कटघोरा की जीवनदायिनी अहिरन नदी पर संकट, सीवेज और औद्योगिक गंदगी से बिगड़े हालात
नमस्ते कोरबा :- कभी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली अहिरन नदी आज प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रही है। कोरबा जिले के कटघोरा नगर से सामने आई तस्वीरें हालात की भयावहता बयां कर रही हैं, जहां नगर का गंदा पानी और राइस मिलों का अपशिष्ट सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है।
करीब 70 हजार की आबादी वाले कटघोरा नगर पालिका के 15 वार्डों का सीवेज बिना उपचार के अहिरन नदी में बहाया जा रहा है। नतीजतन नदी का पानी जहरीला और उपयोग के लायक नहीं रह गया है। इस नदी पर निर्भर आसपास के आधा दर्जन गांवों के किसान और ग्रामीण अब गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
कटघोरा से लगे ग्राम डुडगा के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 5 वर्षों से लगातार नगर का सीवेज और राइस मिलों का दूषित पानी नदी में मिल रहा है। इससे जहां खेतों की उपज पर असर पड़ा है, वहीं लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों में खुजली और अन्य चर्म रोग तेजी से फैल रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो नगर पालिका और न ही प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम उठाया है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
वहीं नगर पालिका परिषद कटघोरा के अध्यक्ष का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए पहल शुरू कर दी गई है। अहिरन नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जल्द ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए राज्य सरकार ने 5 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दे दी है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पहल समय रहते पूरी हो पाएगी? और क्या केवल एक एसटीपी इस लंबे समय से चले आ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए पर्याप्त होगा? यह मामला केवल एक नदी का नहीं, बल्कि हमारी सोच और प्राथमिकताओं का आईना है। विकास की दौड़ में यदि जल स्रोतों की अनदेखी की जाएगी, तो उसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
अब जरूरत है त्वरित और ठोस कार्रवाई की न केवल एसटीपी निर्माण की, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर सख्त नियंत्रण, नियमित मॉनिटरिंग और जनभागीदारी सुनिश्चित करने की। अहिरन नदी को बचाना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है।










