कटघोरा वनमंडल में 15 हाथियों का दल जलक्रीड़ा और मिट्टी स्नान करता दिखा, देखिए जलक्रीड़ा और मिट्टी स्नान का मनमोहक नजारा
नमस्ते कोरबा :- कटघोरा वनमंडल अंतर्गत सलिहाभाठा क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों हाथियों का मनमोहक नजारा देखने को मिल रहा है। करीब 15 हाथियों का एक दल, जिसमें विशाल नर हाथी, मादाएं और नन्हे शावक शामिल हैं, जंगल के बीच जलाशय में अठखेलियां करते और अपने ऊपर मिट्टी उड़ाकर प्राकृतिक स्नान का आनंद लेते नजर आया। हाथियों की यह स्वाभाविक गतिविधि वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी दुर्लभ दृश्य से कम नहीं है।
कटघोरा वनमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों हाथियों के कई दल अलग-अलग स्थानों पर विचरण कर रहे हैं। वन विभाग के अनुसार क्षेत्र के जंगलों में भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता होने के कारण हाथियों ने फिलहाल यहीं डेरा जमा रखा है। यही वजह है कि उनका लंबे समय तक जंगल में ठहराव बना हुआ है।
जंगल में हाथियों की मस्ती ने लूटी महफिल, जलक्रीड़ा और मिट्टी स्नान का मनमोहक नजारा
हालांकि जंगल में हाथियों की यह मस्ती जितनी आकर्षक दिखाई देती है, उतनी ही चिंता आसपास के ग्रामीणों के लिए भी बनी हुई है। यही हाथियों का दल समय-समय पर रिहायशी इलाकों की ओर पहुंच जाता है, जिससे फसल और संपत्ति के नुकसान के साथ-साथ जनहानि की आशंका भी बनी रहती है। हाथियों की मौजूदगी से आसपास के गांवों में लोग सतर्क हैं और रात के समय विशेष सावधानी बरत रहे हैं।
वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। विभाग द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई है कि हाथियों के दल के पास जाने, उन्हें छेड़ने या उनके रास्ते में आने से बचें तथा किसी भी गतिविधि की सूचना तत्काल वन अमले को दें, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति से बचा जा सके।
प्रकृति का अद्भुत नजारा, लेकिन सतर्कता भी जरूरी
जंगल में जलक्रीड़ा करते और मिट्टी स्नान का आनंद लेते हाथियों का दृश्य प्रकृति की खूबसूरती को बयां करता है। मगर यही हाथी जब आबादी की ओर रुख करते हैं तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में वन विभाग की सतर्कता और ग्रामीणों का सहयोग ही मानव-हाथी संघर्ष को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।









