नल-जल योजना की पोल: 85 लाख की पानी टंकी 2 साल से अधूरी, 900 परिवार प्यासे
नमस्ते कोरबा :- केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की बहुप्रचारित नल-जल योजना की जमीनी हकीकत कोरबा जिले में सवालों के घेरे में है। पोंडी उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम पंचायत पचरा में करीब 85 लाख रुपये की लागत से बन रही पानी टंकी पिछले दो वर्षों से अधूरी पड़ी है, जिससे योजना की कार्यप्रणाली और निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य लंबे समय से पूरी तरह ठप है। पीएचई विभाग और संबंधित ठेकेदार पिछले एक साल से अधिक समय से साइट पर नहीं पहुंचे, जिससे काम अधर में लटका हुआ है। अधूरी संरचना अब बदहाल स्थिति में खड़ी होकर सरकारी तंत्र की लापरवाही की कहानी बयां कर रही है।
इस टंकी के शुरू हो जाने से गांव के लगभग 900 से अधिक परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकता था, खासकर भीषण गर्मी में यह योजना राहत का बड़ा सहारा बनती। लेकिन लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली के चलते ग्रामीण आज भी पानी की मूलभूत सुविधा से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मामले में लापरवाही के साथ-साथ भ्रष्टाचार की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि भारी भरकम राशि खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्य अधूरा है और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय नहीं हो पाई है।
अधूरी पड़ी पानी टंकी की तस्वीरें शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही हैं। यह मामला न सिर्फ योजना के क्रियान्वयन की सच्चाई उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कागजों में पूरी दिखने वाली योजनाएं जमीन पर दम तोड़ रही हैं।










