SECL की गेवरा परियोजना के तहत,रोजगार में हक की लड़ाई तेज: भिलाई बाजार के मूलनिवासियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
नमस्ते कोरबा :- जिले के भिलाई बाजार क्षेत्र के ग्रामवासियों ने अपनी जमीन और आजीविका पर पड़े प्रभाव को लेकर अब रोजगार के अधिकार की लड़ाई तेज कर दी है, सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और SECL की गेवरा परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित मूलनिवासी परिवारों को स्थायी नौकरी में प्राथमिकता देने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने बताया कि परियोजना विस्तार के चलते उनकी पुश्तैनी जमीन, रोजगार के साधन और सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद वास्तविक प्रभावित परिवारों को दरकिनार कर बाहरी लोगों द्वारा केवल नौकरी पाने के उद्देश्य से जमीन खरीदी जा रही है, जो न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि मूलनिवासियों के अधिकारों का सीधा हनन भी है।
भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को स्थायी नौकरी में प्राथमिकता देने की मांग, बाहरी लोगों की दखल पर जताई आपत्ति
ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई है कि वर्ष 2024 की धारा-4 अधिसूचना के बाद जमीन खरीदने वालों को रोजगार के लाभ से वंचित किया जाए। वहीं, पात्रता तय करने के लिए 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना और राजस्व अभिलेखों को आधार बनाने की बात कही गई है, ताकि वास्तविक मूलनिवासी परिवारों की पहचान सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीणों ने यह भी प्रस्ताव रखा कि वर्ष 2020 के बाद किए गए भूमि क्रय को नौकरी प्राप्ति का आधार न माना जाए। ग्राम सभा की भूमिका को मजबूत करते हुए पात्रता सूची तैयार करने और शासन स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस दौरान ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, जनपद सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर अपने हक की आवाज बुलंद की।









