रिश्तों की महक : बरसों बाद मामा के घर पहुँची तो लगा, मेरा बचपन आज भी वहीं मेरा इंतज़ार कर रहा था

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रिश्तों की महक : बरसों बाद मामा के घर पहुँची तो लगा, मेरा बचपन आज भी वहीं मेरा इंतज़ार कर रहा था

नमस्ते कोरबा :- शादी के बाद अक्सर कहा जाता है कि बेटियां अपने मायके में भी मेहमान बन जाती हैं। लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जहां समय दूरी और जिम्मेदारियां भी अपनापन कम नहीं कर पातीं। यह एहसास मुझे तब हुआ जब कई वर्षों बाद अपने पति और बड़ी बेटी के साथ रायगढ़ स्थित मामा के घर जाने का अवसर मिला।

मैं कोरबा में पली-बढ़ी लेकिन मेरा बचपन रायगढ़ के उस आंगन में भी बीता जहां हर छुट्टियों में मेरा इंतजार होता था। मामा का स्नेह मामी का दुलार और मामा के बेटों का निस्वार्थ प्यार… कभी यह महसूस ही नहीं होने दिया कि मैं इस घर की मेहमान हूं। उस घर में मेरा परिचय सिर्फ इतना था“हमारी बेटी आ गई।”

फिर वक्त बदला। शादी हुई जिम्मेदारियां बढ़ीं और मुलाकातों के बीच वर्षों का फासला आ गया। कुछ दिन पहले जब मैं अपने पति और बेटी के साथ मामा के घर पहुंची तो मन में एक अनकहा डर था। सोच रही थी कि इतने सालों बाद शायद बहुत कुछ बदल गया होगा।

लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला, कानों में बड़े भैया की वही पुरानी आवाज गूंजी “अरे… आ गई मेरी बहन,बस इतना सुनना था कि पूरे रास्ते संभाले हुए जज्बात आंखों से छलक पड़े। मामा के बेटों ने उसी अधिकार से मेरा हाथ थाम लिया। किसी ने मेरा सामान उठाया, किसी ने मेरी बेटी को प्यार से गले लगाया किसी ने मेरे पति का सम्मान से स्वागत किया।

उनके व्यवहार में ज़रा-सा भी बदलाव नहीं था। बदल गई थी तो सिर्फ मेरी उम्र.. उस पल लगा समय आगे बढ़ गया है… लेकिन रिश्ते वहीं ठहरे हुए हैं जहां बचपन उन्हें छोड़कर आया था।

मेरी बेटी शायद समझ नहीं पा रही थी कि उसकी मां बार-बार आंखें क्यों पोंछ रही है। उसने मासूमियत से पूछा “मम्मी आप रो क्यों रही हैं?”

मेरे पास उस सवाल का जवाब शब्दों में नहीं था। मैं सिर्फ इतना कह सकी “बेटा… जिन घरों में सालों बाद भी बेटियों का स्वागत ‘मेहमान‘ नहीं, ‘अपनी बेटी’ कहकर होता है, वहां आंखों से नहीं… दिल से आंसू निकलते हैं।”**ईश्वर हर बेटी को ऐसा मामा का घर दे जहाँ बरसों बाद लौटने पर दरवाज़ा खुलते ही कोई बाँहें फैलाकर कहे “आ गई हमारी बेटी…” उस पल बेटी की आँखों से जो आँसू गिरते हैं, वे दुख के नहीं होते…

वे उस अनमोल अपनापन की गवाही होते हैं, जिसे दुनिया की कोई दौलत कोई शोहरत और कोई वैभव कभी खरीद नहीं सकता। जिस बेटी के हिस्से ऐसा प्यार आ जाए… समझ लीजिए ईश्वर ने उसे दुनिया का सबसे बड़ा ख़ज़ाना दे दिया।

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