मानिकपुर खदान विस्तार: 25 सितंबर की जनसुनवाई से पहले भू-विस्थापितों का हल्लाबोल
नमस्ते कोरबा :- मानिकपुर ओपनकास्ट कोल परियोजना के विस्तार को लेकर 25 सितंबर को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले भू-विस्थापित ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रभावित ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और पुनर्स्थापना से जुड़े मामले लंबित हैं। ऐसे में इनका निराकरण किए बिना जनसुनवाई कराना प्रभावित परिवारों के साथ न्याय नहीं होगा।
ग्रामीणों के अनुसार मानिकपुर क्षेत्र में वर्ष 1963-64 में अनेक किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन कई प्रभावित परिवारों को आज तक उनकी जमीन का उचित मुआवजा और रोजगार नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों ने कहा कि वे समय-समय पर एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन एवं ज्ञापन देकर अपनी मांगें रखते रहे हैं, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी अनेक मामले समाधान की प्रतीक्षा में हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया सवाल पहले पुराने मामलों का हिसाब हो
भू-विस्थापितों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले पुराने प्रभावित परिवारों के अधिकारों का निराकरण जरूरी है। उनका कहना है कि भू-विस्थापन सिर्फ जमीन चले जाने का नाम नहीं है। इसके साथ परिवार की आजीविका, खेती, मकान, सामाजिक परिवेश और बच्चों का भविष्य भी प्रभावित होता है।
ग्रामीणों ने मांग की कि जिन परिवारों की जमीन पहले ही परियोजना के लिए ली जा चुकी है, उनके लंबित मुआवजा प्रकरणों का तत्काल निराकरण किया जाए। पात्र प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता मिले और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना की प्रक्रिया महज कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे।
आठ गांवों के ग्रामीणों का धरना जारी
जनसुनवाई की नई तारीख घोषित होने के बाद प्रभावित ग्रामीण मानिकपुर परियोजना के महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष धरना दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास और परियोजना विस्तार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी कर विकास की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़नी चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जनसुनवाई से पहले प्रभावित परिवारों के साथ बैठकर प्रत्येक मांग पर बिंदुवार चर्चा करने और समयबद्ध समाधान तय करने की मांग की है। प्रमुख मांगों में लंबित मुआवजा, भूमि के बदले रोजगार, पात्र युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना तथा प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं शामिल हैं।
21 अगस्त को टली थी सुनवाई, अब 25 सितंबर की तैयारी
मानिकपुर ओपनकास्ट एक्सपेंशन परियोजना की उत्पादन क्षमता 5.25 एमटीपीए से बढ़ाकर 7.0 एमटीपीए किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 21 अगस्त को पर्यावरणीय जनसुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन प्रभावितों की आपत्तियों और लंबित प्रक्रियाओं के चलते इसे आगे बढ़ाया गया। अब 25 सितंबर को नई तारीख निर्धारित की गई है। प्रशासन की ओर से जनसुनवाई की तैयारियां जारी हैं।
मंत्री ने भी कहा था मुआवजा और पुनर्वास के बाद हो सुनवाई
खास बात यह है कि 21 अगस्त की प्रस्तावित जनसुनवाई से पहले उद्योग मंत्री एवं कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन ने एसईसीएल प्रबंधन से चर्चा कर मुआवजा, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना से जुड़े लंबित कार्यों के निराकरण तथा काचांदी नाला डायवर्सन की निरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही जनसुनवाई कराने के निर्देश दिए थे।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल भी ग्रामीणों के साथ
इधर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल भी प्रभावित ग्रामीणों के धरने में पहुंच चुके हैं। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि 25 सितंबर की जनसुनवाई केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने लंबित मामलों के लिए ठोस कार्ययोजना और पात्र प्रभावित युवाओं के रोजगार की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने की मांग उठाई है।
अब मानिकपुर में 25 सितंबर की जनसुनवाई प्रशासन, एसईसीएल और भू-विस्थापितों के बीच अगली बड़ी परीक्षा बन गई है। एक ओर परियोजना विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है, दूसरी ओर वर्षों पुराने मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास के सवाल लेकर ग्रामीण धरने पर हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि उनके लिए सवाल सिर्फ नई खदान का नहीं बल्कि पुराने अधूरे हक का भी है।
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