18 पहियों तले कुचली जिंदगी, सड़क किनारे की बदहाली पर कौन लेगा जिम्मेदारी? उरगा में दर्दनाक हादसा CCTV में कैद

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18 पहियों तले कुचली जिंदगी, सड़क किनारे की बदहाली पर कौन लेगा जिम्मेदारी? उरगा में दर्दनाक हादसा CCTV में कैद

नमस्ते कोरबा :- सड़क पर दौड़ते भारी वाहन और किनारों पर पसरी अव्यवस्था… आखिर इसकी कीमत आम आदमी कब तक अपनी जान देकर चुकाता रहेगा? उरगा मुख्य मार्ग पर मंगलवार शाम ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसमें 18 चक्का ट्रेलर के पहियों तले कुचलकर करीब 60 वर्षीय स्कूटी सवार वृद्ध की मौत हो गई।

हादसे का भयावह मंजर CCTV कैमरे में कैद हुआ है। फुटेज सामने आने के बाद सड़क सुरक्षा के दावों के साथ-साथ अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग और सड़क किनारों की बदहाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक ग्राम सेमीपाली निवासी वृद्ध मंगलवार शाम करीब 4:49 बजे अपनी एक्टिवा से उरगा चौक की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे 18 चक्का ट्रेलर ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही वृद्ध संतुलन खोकर सड़क पर गिर पड़े। इससे पहले कि वे संभल पाते, ट्रेलर के पहिए उनके ऊपर से गुजर गए। हादसा इतना भयावह था कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

एक कार सड़क किनारे खड़ी थी, बचने की जगह भी नहीं मिली!

CCTV फुटेज में हादसे के समय सड़क के किनारे एक कार खड़ी नजर आ रही है। दूसरी ओर से भी वाहन गुजर रहे थे। ऐसे में संकरे मार्ग पर स्कूटी सवार के लिए निकलने की जगह सीमित दिखाई देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क का किनारा खाली और समतल होता तो वृद्ध को ट्रेलर से बचने के लिए सड़क से नीचे उतरने की जगह मिल सकती थी। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा, लेकिन सड़क किनारे की अव्यवस्था को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

सड़क चलने के लिए है या अतिक्रमण और पार्किंग के लिए?

इस हादसे ने एक बार फिर सड़क निर्माण और यातायात व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। मुख्य मार्गों के किनारे निजी निर्माण कर रास्ते को संकरा कर दिया जाता है। कहीं दुकानें सड़क तक फैल जाती हैं तो कहीं वाहन घंटों सड़क किनारे खड़े रहते हैं। सड़क खत्म होते ही ऊंचे और ऊबड़-खाबड़ किनारे दोपहिया चालकों के लिए अतिरिक्त खतरा बन जाते हैं। सवाल यह है कि मुख्य सड़कों के किनारे अतिक्रमण पर नियमित कार्रवाई क्यों नहीं होती? सड़क को और सुरक्षित क्यों नहीं बनाया जाता? आखिर दोपहिया चालकों और पैदल राहगीरों के लिए सुरक्षित जगह कौन सुनिश्चित करेगा?

पहले भी होते रहे हैं हादसे, फिर भी सबक कब?

स्थानीय लोगों के मुताबिक उरगा मुख्य मार्ग पर संबंधित क्षेत्र में पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद सड़क किनारे की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। यह हादसा सिर्फ एक वृद्ध की मौत की खबर नहीं बल्कि उन व्यवस्थागत खामियों पर गंभीर सवाल है जिनसे रोजाना हजारों लोग गुजरते हैं।

पुलिस और जिला प्रशासन को मुख्य मार्गों से अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग पर सख्ती करने, सड़क किनारों को समतल कराने और पर्याप्त रोशनी व संकेतकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है। नेशनल हाईवे से लेकर पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और ग्रामीण सड़कों तक सुरक्षा के मानकों पर गंभीरता से काम होना चाहिए।

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