SECL प्रबंधन के रवैये पर क्या कहा मंत्री लखन लाल देवांगन ने,जमीन अधिग्रहण के बाद बसाहट,मुआवजा और रोजगार में देरी पर उठाए सवाल

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SECL प्रबंधन के रवैये पर क्या कहा मंत्री लखन लाल देवांगन ने,जमीन अधिग्रहण के बाद बसाहट,मुआवजा और रोजगार में देरी पर उठाए सवाल

नमस्ते कोरबा :- कोरबा में एसईसीएल की परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों का मुद्दा नया नहीं है। भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, मुआवजा, बसाहट और रोजगार को लेकर प्रभावित परिवार लंबे समय से अपनी समस्याएं सामने रखते रहे हैं। अब इस मुद्दे पर प्रदेश के उद्योग मंत्री एवं कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन का बयान महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वयं कहा है कि एसईसीएल भूमि अधिग्रहण तो करता है लेकिन प्रभावितों के लिए समय पर बसाहट और रोजगार की व्यवस्था नहीं हो पाती।

जटराज सहित अन्य प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि जहां लोगों की बसाहट की व्यवस्था नहीं हुई है वहां मकान हटाए जा रहे हैं। प्रभावितों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह किराया देने की चर्चा का भी उन्होंने उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और प्रभावितों को समय पर बसाहट, मुआवजा और रोजगार उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।

मंत्री का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रभावित परिवारों की ओर से उठाए जा रहे सवालों को अब सरकार के स्तर से भी स्वीकार किया जा रहा है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से अगला सवाल यही है कि यदि समस्या की पहचान हो चुकी है तो उसके समाधान की समयसीमा क्या होगी?

दिलचस्प यह है कि इन समस्याओं को लेकर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पहले से लगातार हस्तक्षेप करते रहे हैं। जून 2026 में उन्होंने भू-विस्थापितों के साथ कोरबा कलेक्ट्रेट पहुंचकर 17 सूत्रीय मांगों को प्रशासन के सामने रखा। इनमें रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास प्रमुख मुद्दे थे।

भिलाई खुर्द के मामले में भी उन्होंने प्रभावित परिवारों के पक्ष में हस्तक्षेप करते हुए वर्तमान स्थिति के आधार पर सर्वे और मुआवजे की मांग उठाई थी। अप्रैल में उन्होंने एसईसीएल अध्यक्ष को पत्र लिखकर न्यायोचित मुआवजा और रोजगार का मुद्दा उठाया तथा प्रभावित परिवारों के मामलों में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की।

अब जब मंत्री देवांगन भी एसईसीएल की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत बता रहे हैं, तो यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से उठ रही आवाजों का मूल प्रश्न एक ही है प्रभावित परिवारों को उनकी जमीन के बदले सम्मानजनक और समयबद्ध पुनर्वास कैसे मिले?

एसईसीएल भारत सरकार का उपक्रम है। इसलिए उससे यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और मानवीय हो। जनप्रतिनिधियों की शिकायतें हों या प्रभावित परिवारों की मांगें इनका समाधान संवाद और स्पष्ट कार्ययोजना से होना चाहिए।

मंत्री देवांगन ने जिस समस्या को सार्वजनिक रूप से उठाया है, अब उसका अगला चरण कार्रवाई और परिणाम होना चाहिए। प्रभावित परिवारों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि जमीन जाने के बाद उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तय समय पर बसाहट, मुआवजा और रोजगार भी मिलेगा। यही कोरबा के विकास और विस्थापन के बीच संतुलन का सबसे महत्वपूर्ण आधार होगा।

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