केराकछार की मिट्टी से एशियन गेम्स के स्वर्ण तक संजू,पेंटिंग का काम करने वाले पिता की बेटी ने मेहनत से बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान
नमस्ते कोरबा :- कोरबा के छोटे से गांव केराकछार की संजू देवी यादव ने सीमित संसाधनों के बीच कबड्डी में अपना मुकाम बनाया है। गांव की स्थानीय प्रतियोगिताओं से शुरू हुआ उनका सफर राष्ट्रीय स्तर से होते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा। एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा रहीं संजू की उपलब्धि पर परिवार के साथ पूरा गांव गर्व कर रहा है।
केराकछार स्थित संजू का छोटा सा घर आज उनके संघर्ष की कहानी कहता है। कमरे में रखे मेडल और सम्मान उनके खेल सफर की गवाही दे रहे हैं। कभी गांव के मैदान में कबड्डी खेलने वाली संजू ने लगातार अभ्यास और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाई और इसके बाद देश की टीम तक पहुंचीं।
**पेंटिंग कर पिता ने संभाला परिवार**
संजू के पिता रामजी यादव पेंटिंग का काम करते हैं। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें मजदूरी और पेंटिंग का सहारा लेना पड़ा। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई और खेल को जारी रखने में पूरा सहयोग दिया। घर की आर्थिक परिस्थितियां संजू के सपनों के रास्ते में बाधा बनीं, लेकिन परिवार ने उनका हौसला नहीं टूटने दिया।
गांव में खेल सुविधाएं सीमित थीं। इसके बावजूद संजू ने स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। बेहतर प्रदर्शन के साथ उनका चयन आगे के स्तरों के लिए होता गया और मेहनत उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक ले गई।
**सफलता के बाद भी घर वही**
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के बाद भी संजू का परिवार आज भी सादगी से जीवन जी रहा है। केराकछार स्थित घर में प्रधानमंत्री आवास का निर्माण चल रहा है। एक ओर घर की सामान्य परिस्थितियां हैं तो दूसरी ओर कमरे में सजे पदक उनकी उपलब्धि की कहानी कहते हैं।
संजू की उपलब्धि परिवार के साथ पूरे केराकछार के लिए गर्व का विषय है। **गांव के मैदान से शुरू हुआ उनका सफर आज देश की जर्सी तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि बताती है कि सीमित संसाधनों के बीच भी प्रतिभा मेहनत और अवसर मिलने पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान बना सकती है।**









