जटराज में विस्थापन पर बवाल, बारिश में मकान खाली कराने का आरोप,कुसमुंडा मेगा प्रोजेक्ट के विस्तार का मामला : ग्रामीणों ने प्रेसवार्ता कर कार्रवाई रोकने की मांग की

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जटराज में विस्थापन पर बवाल, बारिश में मकान खाली कराने का आरोप,कुसमुंडा मेगा प्रोजेक्ट के विस्तार का मामला : ग्रामीणों ने प्रेसवार्ता कर कार्रवाई रोकने की मांग की

नमस्ते कोरबा :- एसईसीएल के कुसमुंडा मेगा प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए जटराज में चल रही भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्ण पुनर्वास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना ही मकान खाली कराने और तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों ने बारिश के बीच कुछ परिवारों को महज तीन दिन में मकान खाली करने का दबाव दिए जाने का भी आरोप लगाया।

रविवार को प्रभावित भूविस्थापित जोगीराम पटेल, दिलहरण सारथी, बृजेश श्रीवास सहित अन्य ग्रामीणों ने कोरबा प्रेस क्लब के तिलक भवन में पत्रकार वार्ता कर अपनी आपत्तियां रखीं। ग्रामीणों के अनुसार जटराज की भूमि का अधिग्रहण अलग-अलग चरणों में 1978-79, 1983, 1984 और 2010 में किया गया। अंतिम चरण के अधिग्रहण के करीब 16 साल बाद अब अगस्त-सितंबर 2026 में गांव खाली कराने की प्रक्रिया तेज हुई है।

चार जगह बसाने पर जताई आपत्ति

ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को सर्वमंगला नगर, 14 नंबर डम्प, वैशाली नगर/खमहरिया सहित अलग-अलग स्थानों पर बसाने की प्रक्रिया की जा रही है। वर्षों से एक साथ रह रहे परिवारों को अलग-अलग जगह बसाने से सामाजिक और सामुदायिक व्यवस्था प्रभावित होगी। ग्रामीणों ने सभी प्रभावित परिवारों को एक ही स्थान पर बसाने की मांग की है।

बसाहट में सुविधाओं पर सवाल

ग्रामीणों ने पुनर्वास स्थलों पर पेयजल, बिजली, सड़क, नाली, मुक्तिधाम और खेल मैदान जैसी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया। 14 नंबर डम्प स्थल के पास पानी भरे होने, सुरक्षा बाउंड्रीवाल नहीं होने और डम्प क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी खतरे की बात भी कही गई। सामुदायिक भवन की दीवारों में दरारें होने का दावा करते हुए ग्रामीणों ने सुरक्षित बसाहट की मांग की।

मुआवजे की प्रक्रिया पर भी सवाल

भूविस्थापितों ने मुआवजा निर्धारण को लेकर भी आपत्ति जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रबंधन की ओर से तैयार शपथ पत्र पर हस्ताक्षर के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि मुआवजा राशि के आकलन और भविष्य में बदलाव नहीं करने जैसी शर्तों को लेकर उन्हें आपत्ति है। ग्रामीणों ने मुआवजे का पारदर्शी आकलन और जमीन-मकान का उचित प्रतिकर दिए जाने की मांग की।

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