संडे स्पेशल : मोबाइल की दुनिया में सिमटते रिश्ते: क्या हम अपनों से दूर होते जा रहे हैं?

Must Read

संडे स्पेशल : मोबाइल की दुनिया में सिमटते रिश्ते: क्या हम अपनों से दूर होते जा रहे हैं?

नमस्ते कोरबा : रविवार… यानी परिवार के साथ समय बिताने का दिन। कभी यही दिन घर के आंगन में हंसी-ठिठोली, ताश की बाजियां, बच्चों की शरारतें और बुजुर्गों की कहानियों से गुलजार रहता था। लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है। एक ही कमरे में बैठे परिवार के चार लोग चार अलग-अलग स्क्रीन में खोए रहते हैं। बातचीत की जगह अब नोटिफिकेशन की आवाज ने ले ली है।

मोबाइल फोन ने हमारी जिंदगी आसान जरूर बनाई है। कुछ सेकंड में दुनिया की खबर मिल जाती है, दूर बैठे अपनों से वीडियो कॉल पर बात हो जाती है और जरूरी काम भी घर बैठे पूरे हो जाते हैं। लेकिन इसी सुविधा ने धीरे-धीरे रिश्तों के बीच एक अदृश्य दूरी भी पैदा कर दी है।

आज हालात ऐसे हैं कि सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले मोबाइल देखा जाता है और रात को सोने से पहले आखिरी नजर भी उसी स्क्रीन पर जाती है। परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की परंपरा खत्म होती जा रही है। पहले खाने की मेज पर दिनभर की बातें होती थीं, अब वहां भी मोबाइल की स्क्रीन चमकती रहती है।

इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर दिखाई दे रहा है। माता-पिता यदि हर समय फोन में व्यस्त रहते हैं तो बच्चे भी वही सीखते हैं। खेल के मैदान खाली हो रहे हैं और मोबाइल गेम्स बच्चों की नई दुनिया बनते जा रहे हैं। वहीं किशोरों और युवाओं में सोशल मीडिया पर लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़ मानसिक तनाव और अकेलेपन का कारण बन रही है।

बुजुर्ग भी इस बदलाव से अछूते नहीं हैं। वे अक्सर शिकायत करते हैं कि घर में सभी मौजूद हैं, लेकिन बात करने वाला कोई नहीं। उनके पास अनुभवों का खजाना है, लेकिन सुनने के लिए किसी के पास समय नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल समस्या नहीं है, उसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल समस्या है। तकनीक का उद्देश्य जीवन को आसान बनाना है, न कि रिश्तों को कमजोर करना।

रिश्तों को मजबूत रखने के लिए बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है। दिन में कुछ घंटे मोबाइल से दूरी, परिवार के साथ बिना स्क्रीन के भोजन, बच्चों के साथ खेलना और बुजुर्गों के साथ कुछ समय बिताना जैसे छोटे-छोटे कदम रिश्तों में फिर से गर्माहट ला सकते हैं।

सोचिए…

अगर आपका मोबाइल कुछ घंटों के लिए बंद हो जाए तो शायद ज्यादा परेशानी नहीं होगी। लेकिन अगर रिश्ते हमेशा के लिए खामोश हो जाएं, तो कोई तकनीक उन्हें वापस नहीं ला सकती।  मोबाइल का इस्तेमाल करें, लेकिन अपनों को समय देना कभी न भूलें। क्योंकि जिंदगी की सबसे खूबसूरत यादें किसी स्क्रीन में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए गए पलों में बसती हैं।

Read more :- कटघोरा वनमंडल में 15 हाथियों का दल जलक्रीड़ा और मिट्टी स्नान करता दिखा, देखिए जलक्रीड़ा और मिट्टी स्नान का मनमोहक नजारा

- Advertisement -

सब्सक्राइब करें नमस्ते कोरबा न्यूज़ YOUTUBE चैनल

5,710SubscribersSubscribe
- Advertisement -
Latest News

अपराधियों पर मंत्री “लखन” का जीरो टोलरेंस, पहले कबाड़ी अब रज्जाक खान के अवैध मकान पर चला बुलडोजर

अपराधियों पर मंत्री "लखन" का जीरो टोलरेंस, पहले कबाड़ी अब रज्जाक खान के अवैध मकान पर चला बुलडोजर नमस्ते कोरबा।...

More Articles Like This

- Advertisement -