SECL मानिकपुर विस्तार परियोजना को लेकर ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश बोले, पहले पुराने वादे पूरे हों फिर हो जनसुनवाई
नमस्ते कोरबा : SECL की मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित गांवों के भू-विस्थापितों और किसानों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आया है। भिलाई खुर्द, दादर खुर्द, रापाखर्रा और मानिकपुर क्षेत्र के ग्रामीणों ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को तत्काल रद्द करने की मांग की है। इस संबंध में भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने जिला कलेक्टर को कड़ा ध्यानाकर्षण पत्र सौंपते हुए चेतावनी दी है कि मांगों का निराकरण किए बिना जनसुनवाई कराई गई तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले अपनी जमीनें गंवाने के बाद भी कई भू-विस्थापित अब तक रोजगार, उचित मुआवजा और पुनर्वास सहित अपने अधिकारों के लिए भटक रहे हैं। उनका कहना है कि SECL प्रबंधन द्वारा पूर्व में किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे में बिना लंबित समस्याओं का समाधान किए नई परियोजना के विस्तार के लिए जनसुनवाई कराना ग्रामीणों के साथ अन्याय है।
400 युवाओं की नियमित भर्ती की मांग
भू-विस्थापितों ने क्षेत्र के युवाओं के लिए कम से कम 400 पदों पर नियमित एवं स्थायी रोजगार देने की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि प्रभावित परिवारों के युवाओं को रोजगार का आश्वासन लंबे समय से दिया जाता रहा है, लेकिन उन्हें उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला। ग्रामीणों ने मौके पर ही पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
मकान-जमीन का दोबारा मूल्यांकन
भिलाई खुर्द-1 के शेष मकानों और जमीनों का पारदर्शी तरीके से पुनर्मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन कराने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों के अनुसार भिलाई खुर्द के विभिन्न हिस्सों में प्रभावित परिवारों को अब तक उनके अधिकारों का उचित लाभ नहीं मिल सका है।
रापाखर्रा और दादर खुर्द को लेकर भी नाराजगी
रापाखर्रा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने के साथ गांव के लिए आवागमन का उचित मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की गई है। वहीं दादर खुर्द की कृषि भूमि पर भविष्य में बड़े पैमाने पर ओवरबर्डन (ओबी) डंपिंग किए जाने पर रोक लगाने की मांग ग्रामीणों ने उठाई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदान विस्तार के कारण रापाखर्रा गांव चारों ओर से खनन गतिविधियों से घिर गया है। इससे आवागमन सहित मूलभूत सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। उनका कहना है कि प्रभावितों की समस्याओं का समाधान किए बिना खदान विस्तार को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।
प्रशासन पर एकतरफा रवैये का आरोप
भू-विस्थापित संगठन ने प्रशासन और SECL प्रबंधन पर प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि एक ओर वर्षों से ग्रामीण अपनी जमीन और आजीविका खोने के बाद न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर परियोजना विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
21 अगस्त को आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 21 अगस्त की प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित नहीं की गई और लंबित मांगों का समाधान नहीं हुआ तो कल्याण मंडप में उग्र आंदोलन किया जाएगा। संगठन ने कहा है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले टकराव अथवा अप्रिय परिस्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन और SECL प्रबंधन की होगी।
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