महामृत्युंजय मंदिर में बढ़ रही ज्योति कलशों की संख्या, कन्या पूजन और पूर्णाहुति के साथ नवरात्रि का समापन,संत परंपरा और साधना से जुड़ा है मंदिर का इतिहास, नवरात्र में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था
नमस्ते कोरबा : नवरात्र पर्व के अवसर पर श्री श्री 108 श्री महामृत्युंजय मंदिर में ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं। मंदिर से जुड़ी संत परंपरा, साधना और श्रद्धालुओं की आस्था के चलते यहां ज्योति कलश प्रज्वलित कराने वाले भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। नवरात्र के अंतिम चरण में मंदिर में आज कन्या पूजन और पूर्णाहुति का आयोजन किया जाएगा।

महामृत्युंजय मंदिर स्वर्गीय प्रहलाद पुरी गोस्वामी जी की साधना स्थली रहा है। वे मंदिर के प्रथम पुजारी होने के साथ ही एक दिव्य संत के रूप में श्रद्धालुओं के बीच सम्मानित थे। मंदिर का संबंध उनके गुरुदेव की साधना परंपरा से भी रहा है। वर्तमान में उनके पौत्र श्री नागेश्वर पुरी गोस्वामी मंदिर के मुख्य पुजारी हैं और इस आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

मंदिर की साधना परंपरा में उनके गुरुदेव श्री दिगंबर अखिलेश पुरी जी महाराज का भी विशेष स्थान है। वे दशनाम नागा संन्यासी हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, वे महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां पहुंचकर जनकल्याण के लिए अखंड साधना करते हैं। श्रद्धालु मंदिर की इस साधना परंपरा और आध्यात्मिक वातावरण को विशेष महत्व देते हैं।

भक्तों की मान्यता है कि मां भगवती के प्रति श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रज्वलित किए गए ज्योति कलश से मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष मंदिर में ज्योति कलशों की संख्या बढ़ रही है। नवरात्र के दौरान यहां पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना जारी है।
आज मंदिर में विधि-विधान से कन्या पूजन किया जाएगा। इसके साथ ही हवन एवं पूर्णाहुति के माध्यम से नवरात्र अनुष्ठान का समापन होगा। श्रद्धालु मां भगवती से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना करेंगे।
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