महाअष्टमी विशेष: आइए हमारे साथ करें चैतुरगढ़ धाम में मां महिषासुर मर्दिनी के दर्शन
नमस्ते कोरबा :- नवरात्रि की महाअष्टमी पर आइए चलते हैं कोरबा जिले के ऐतिहासिक चैतुरगढ़ धाम जहां पहाड़ों की ऊंचाइयों के बीच मां महिषासुर मर्दिनी का दिव्य दरबार श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। मैकाल पर्वत श्रृंखला में करीब तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह धाम धार्मिक महत्ता, प्राचीन विरासत और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम है।
जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित चैतुरगढ़ को लाफागढ़ के नाम से भी जाना जाता है। यहां मंदिर में मां महिषासुर मर्दिनी की 12 भुजाओं वाली प्रतिमा विराजमान है। नवरात्रि के दौरान दूर-दराज से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पहाड़ी पर गूंजते जयकारे पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं।
राजा पृथ्वीदेव प्रथम से जुड़ी है मान्यता
चैतुरगढ़ धाम के इतिहास को लेकर मान्यता है कि कलचुरी वंश के राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने मां महिषासुर मर्दिनी के स्वप्न में मिले निर्देश के बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया था। प्राकृतिक रूप से सुरक्षित पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन किला ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
सात जलाशय और शिव गुफा हैं आकर्षण
चैतुरगढ़ की खासियत केवल माता का मंदिर ही नहीं, बल्कि यहां की प्राकृतिक और धार्मिक विरासत भी है। किले में सात प्राचीन जलाशय होने की बात कही जाती है, जिनमें से तीन में सालभर पानी रहने की मान्यता है। वहीं, शंकर खोल गुफा में स्थापित शिवलिंग श्रद्धालुओं की आस्था का एक अन्य प्रमुख केंद्र है।
प्राचीन द्वारों से होकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
ओमकारा द्वार, मेनका द्वार और सिंह द्वार जैसे प्राचीन प्रवेश मार्ग इस दुर्ग की ऐतिहासिक पहचान को दर्शाते हैं। चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ी का समतल क्षेत्र और प्राचीन संरचनाएं चैतुरगढ़ को विशिष्ट बनाती हैं।
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