आस्था के आगे बेअसर रही तपिश, कथा में उमड़ा जनसैलाब, तेज धूप के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर
नमस्ते कोरबा :- दिव्य श्री हनुमंत कथा के दूसरे दिन ढपढप की पावन धरती पर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। तेज धूप और गर्म मौसम के बावजूद हजारों श्रद्धालु कथा स्थल पर डटे रहे और पूरे मनोयोग से कथा श्रवण करते रहे। पंडाल में उमड़ा जनसैलाब, अनुशासन और भक्ति भाव इस आयोजन की भव्यता को और भी विशेष बना रहा था।
कथा प्रारंभ होते ही आचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने सरल, सहज और प्रभावशाली वचनों से भक्तों के हृदय को स्पर्श किया। उन्होंने कोरबा, विशेषकर ढपढप क्षेत्र की प्रशंसा करते हुए इसे पुण्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण भूमि बताया। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों का प्रेम और समर्पण ही इस आयोजन को दिव्यता प्रदान कर रहा है।
आचार्य श्री ने कथा के महत्व को सरल उदाहरण से समझाते हुए कहा कि जैसे शरीर को जीवित रखने के लिए प्रतिदिन भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा और मन की शुद्धि के लिए नियमित कथा श्रवण जरूरी है। उन्होंने कहा कि “जैसे बर्तन को रोज मांजने से वह चमकता है, वैसे ही कथा से मन और हृदय निर्मल होता है।”
कथा के दौरान हनुमान जी की समुद्र यात्रा और ‘सुरसा’ प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। आचार्य श्री ने बताया कि किस प्रकार हनुमान जी ने शक्ति के साथ-साथ बुद्धि, धैर्य और विनम्रता का परिचय देते हुए बाधा को पार किया। उन्होंने संदेश दिया कि जीवन की हर कठिनाई केवल बल से नहीं, बल्कि विवेक और संयम से भी जीती जा सकती है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस दिनभर सक्रिय रहे। यातायात नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। कड़ी धूप के बीच भी जवानों ने व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
आयोजन समिति एवं प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे कथा स्थल पर अनावश्यक महंगे आभूषण पहनकर न आएं। आर्टिफिशियल ज्वेलरी का उपयोग करें और सतर्क रहें। साथ ही सभी से अनुशासन और सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया गया है, ताकि यह विशाल आयोजन शांतिपूर्ण और भव्य रूप से संपन्न हो सके।
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