Friday, January 30, 2026

“सिकुड़ते जंगल, बढ़ता संघर्ष :“मानव विस्तार ने छीनी हाथियों की राह”

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“सिकुड़ते जंगल, बढ़ता संघर्ष :“मानव विस्तार ने छीनी हाथियों की राह”

नमस्ते कोरबा :- हजारों वर्षों से भारतीय जंगलों में रहने वाले एशियन हाथी आज अपने ही घर में शरणार्थी की तरह भटक रहे हैं। विशालकाय शरीर और अपार शक्ति के बावजूद यह पृथ्वी के सबसे शांत और भावनात्मक जीवों में से एक हैं। लेकिन बढ़ते निर्माण, घटते जंगल, और मनुष्य के लालच ने उनके अस्तित्व पर एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया है,क्या अगली पीढ़ी हाथियों को सिर्फ किताबों में देखेगी?

एशियन हाथी अत्यंत सामाजिक होते हैं। झुंड की अगुवाई अनुभवी मादा करती है जिसे “मेट्रिआर्क” कहा जाता है। बच्चों को घेरे में लेकर चलना और खतरे की स्थिति में सामूहिक रक्षा प्रकृति के इन नियमों में अद्भुत अनुशासन छिपा है। नर अक्सर अकेले रहते हैं, लेकिन अपनी टोली से उनका भावनात्मक संबंध कभी नहीं टूटता।

हाथियों की दुनिया केवल शरीर की ताकत से नहीं, भावनाओं और संवेदनाओं से संचालित होती है। वे अपने मृत साथी को श्रद्धांजलि देते हैं, बच्चों के साथ खेलते हैं और परिवार की यादों को वर्षों तक संजोए रखते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों में यह साबित हो चुका है कि हाथी खुद को दर्पण में पहचान सकते हैं,जो अत्यंत उन्नत बुद्धिमत्ता का संकेत है।

प्रतिदिन 150 से 200 किलो भोजन और लगातार पानी की तलाश उन्हें लंबी दूरी तक ले जाती है। यही वह संघर्ष है जो उन्हें खेतों, गांवों और मानव बस्तियों तक पहुंचा देता है। संघर्ष का दोष अक्सर हाथियों पर लगा दिया जाता है, जबकि असल वजह shrinking forests और मनुष्य का अनियंत्रित विस्तार है।

हाथियों की समस्या केवल पर्यावरण का विषय नहीं, यह हमारी सभ्यता का सवाल है। एक हाथी का खोना, केवल एक जानवर का खोना नहीं,ये हमारी सांस्कृतिक स्मृति, जैव विविधता और पृथ्वी के संतुलन का टूटना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा, कॉरिडोर और भोजन-पानी के प्राकृतिक संसाधन समय रहते संरक्षित नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में एशियन हाथी ख़तरे की सूची में सबसे ऊपर होंगे।

आज सवाल सिर्फ संरक्षण का नहीं, एक संवेदनशील मानव बनने का है। हाथियांे को बचाना, जंगलों को बचाना है, और जंगलों को बचाना असल में आने वाले कल को बचाना है। हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जो जीव हमें मानवता सिखाता है, उसके अस्तित्व को मनुष्य ही खतरे में डाल रहा है।

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