Wednesday, February 18, 2026

जन चौपाल में छोटे-छोटे कामों के लिए कलेक्टर से गुहार,आखिर स्थानीय जनप्रतिनिधि और मैदानी अमला क्या कर रहे हैं

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जन चौपाल में छोटे-छोटे कामों के लिए कलेक्टर से गुहार,आखिर स्थानीय जनप्रतिनिधि और मैदानी अमला क्या कर रहे हैं

नमस्ते कोरबा  :- जिला कलेक्टर संजीव झा द्वारा प्रत्येक मंगलवार को जन चौपाल का आयोजन किया जाता है जिसमें शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर को आवेदन देने पहुंच रहे हैं,कलेक्टर झा के द्वारा नियमानुसार लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है, पर सवाल यह उठता है कि पीड़ित लोगों की समस्याओं का संबंधित विभाग पहले क्यों नहीं समाधान कर पा रहा है, बात जिला कलेक्टर तक पहुंचे उससे पहले छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर चक्कर काट रहे आम नागरिकों के काम संवेदना के साथ निपटाए क्यों नहीं जा रहे है,

जन चौपाल में आज 141 लोगों ने आवेदन प्रस्तुत किए। जनचौपाल में करतला तहसील अंतर्गत ग्राम पुरैना निवासी भोकचंद ने कलेक्टर झा को बताया कि वह पिछले दो वर्षों से लकवा ग्रस्त है। उसे चलने में परेशानी होती है। उन्होंने अपने परिजनों के साथ जन चौपाल में पहुंचकर अपने लिए व्हीलचेयर की मांग रखी। कलेक्टर संजीव झा ने इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए समाज कल्याण विभाग को व्हीलचेयर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिस पर विभाग की ओर से तत्काल भोकचंद को व्हीलचेयर उपलब्ध कराया गया। भोकचंद ने इस पर खुशी जताते हुए कलेक्टर झा के प्रति आभार व्यक्त किया।

हर विभाग की अपनी अलग-अलग जिम्मेदारी होती है। शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही उनकी ड्यूटी होती है। प्रशासन को हितग्राहियों को ढूंढ-ढूंढकर लाभान्वित करना चाहिए। इसके लिए सरकार उन्हें वेतन भी देती है। लिहाजा कलेक्टर के कहने पर जो काम प्रशासन तीव्र गति से कठता है, वह पहले क्यों नहीं कर दिया जाता है। इससे पीडित फरियादी को समय पर लाभ मिल जाएगा। साथ ही शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति से भी बच जाएगा। वही जिला कायलिय में उच्चाधिकारी व कलेक्टर दूसरे महत्वपूर्ण कार्य निबटा पाएंगे।

क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर भी सवाल उठता है। वे लगातार क्षेत्र में दौरा करते हैं। जनता से सीधे जुड़े हुए होते हैं। इसके बाद भी उन्हें जरूरतमंदों की बेबसी क्‍यों दिख नहीं रही है। प्रशासन के पास सीमित मानव संसाधन है लेकिन राजनीतिक दलों के पास हर गांव, मोहल्ले, वार्ड और गलियों में कार्यकर्ता हैं। आखिर कार्यकर्ताओं के जरिए ऐसे संवेदनशील मामले नेताओं तक पहुंच क्यों नहीं रहे हैं? जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम जनता को मिल सके,

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