कोरबा में मतदाता सूची से अल्पसंख्यक मतदाताओं को हटाने की साज़िश लोकतंत्र पर सीधा हमला : जयसिंह अग्रवाल
नमस्ते कोरबा । कोरबा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) की प्रक्रिया की आड़ में जो कुछ हो रहा है, वह एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र को कमजोर करने की सुनियोजित राजनीतिक साज़िश है। विश्वसनीय तथ्यों एवं सामने आए दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट हो चुका है कि फॉर्म-7 का बड़े पैमाने पर फर्जी और आपराधिक दुरुपयोग कर विशेष अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया है।
यह कृत्य भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 एवं 326 की खुली अवहेलना है। उपर्युक्त तथ्यों को संज्ञान में लाते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कोरबा कलेक्टर के साथ ही मुख्या चुनाव आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग और प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखा है ।
55 पृष्ठों की सूची, 1566 नाम 98% अल्पसंख्यक
सोशल मीडिया पर प्रसारित लगभग 55 पृष्ठों की सूची में 1566 मतदाताओं के नाम विलोपन के लिए चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से लगभग 98 प्रतिशत मतदाता एक ही अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित हैं। यह आँकड़ा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि पूर्वाग्रह से प्रेरित संगठित षड्यंत्र है।
फर्जी आवेदन पहचान की चोरी सबसे गंभीर तथ्य यह है कि जिन मतदाताओं के नाम और EPIC नंबर से फॉर्म-7 दाखिल किया गया, उन्हें इसकी कोई जानकारी तक नहीं है। उनके नाम का दुरुपयोग कर झूठा लिखा गया कि वे “उस पते पर निवास नहीं करते” या “स्थायी रूप से अन्यत्र चले गए हैं”, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है। यह कृत्य जालसाजी, कूटरचना, पहचान की चोरी और नागरिकों के मताधिकार पर डकैती के समान है।
पहले ही दी गई थी चेतावनी यह भी स्मरणीय है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत जी ने पूर्व में भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर इस षड्यंत्र की आशंका से अवगत कराया था और बताया था कि एक राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर उसके कार्यकर्ता फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश, उस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया।
स्पष्ट मांगें इस गंभीर प्रकरण में आधे-अधूरे कदम अस्वीकार्य हैं। हम स्पष्ट रूप से मांग करते हैं कि
1. कोरबा विधानसभा क्षेत्र में प्राप्त सभी फॉर्म-7 आवेदनों की 100% घर-घर जाकर भौतिक एवं दस्तावेजी जांच कराई जाए।
2. यह सार्वजनिक किया जाए कि किस व्यक्ति या संगठन ने, किसके निर्देश पर, यह फर्जीवाड़ा किया।
3. जिन मामलों में फर्जी या कूटरचित फॉर्म-7 पाए जाएं, वहाँ IPC, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950/1951 तथा आईटी अधिनियम के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई हो।
4. यदि किसी BLO, सुपरवाइज़र या निर्वाचन तंत्र के अधिकारी/कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाए, तो उसके विरुद्ध विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
5. जांच पूर्ण होने तक सभी विवादित विलोपन प्रक्रियाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।
लोकतंत्र पर सीधा प्रहार
मतदाता सूची से नाम हटाना कोई साधारण प्रशासनिक कार्य नहीं है। यह नागरिक के मूल अधिकार पर सीधा हमला है। यदि इस प्रकार के कृत्यों पर कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे न केवल निर्वाचन प्रणाली की विश्वसनीयता नष्ट होगी, बल्कि सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।
जय सिंह अग्रवाल ने कहा की हम जिला निर्वाचन प्रशासन से अपेक्षा नहीं, बल्कि जवाबदेही की मांग करते हैं और यह अपेक्षित है कि इस पूरे प्रकरण में जो भी आदेश या कार्रवाई हो, उसे पूर्ण पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाए।
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