नमस्ते कोरबा :-: पौड़ीबहार स्थित यशश क्लीनिक के संचालक क्षारसूत्र विशेषज्ञ डॉ आर.जी साहू ने बताया कि घर में जब बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता की खुशी का ठिकाना नही रह जाता है। इस ख़ुशी के मौके पर पूरा परिवार और यहां तक कि रिश्तेदार खुशियां मानते है । ऐसे में माता पिता बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए और बीमारियों से बचाने के लिए कुछ प्राचीन संस्कार अपनाते हैं ताकि बच्चा निरोगी और बीमारियों से लड़ने में पूरी तरह से सक्षम रहे।
प्राचीन संस्कारो में से एक है स्वर्ण प्राशन संस्कार, यह सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक संस्कार है जो बच्चे के जन्म से लेकर 16 वर्ष की आयु तक कराया जाता है। स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद चिकित्सा की वह धरोहर है जो बच्चों में होने वाली मौसमी बीमरियों से रक्षा करता है। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य में स्वर्णप्राशन की बहुत अच्छी भूमिका निभाता है।
यह एक प्रक्रिया है जिसे स्वर्ण भस्म (सोने की राख) और अन्य हर्बल अर्क के साथ अर्ध-तरल रूप में लिया जाता है. इसके अलावा यह मुंह के माध्यम से भी बच्चों को दी जाती है, जिसे अश्लार्नप्रसशन, सुवर्णप्रदर्शन, स्वर्णमृद्धा प्रशाना या स्वर्ण बिंदू प्रशाना कहा जाता है. डॉ साहू ने यह भी बताया कि हर महीने की पुष्य नक्षत्र के दिन बच्चों में इस प्रक्रिया को करने से इसका लाभ उच्च रूप से प्राप्त होता है,
*16 साल तक के बच्चों मे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वर्ण बिंदुप्रशन अवश्य कराएं-डॉ आर.जी साहू*
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