*उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा का हुआ समापन*

Must Read

नमस्ते कोरबा :-: गुरुवार की सुबह उगते सूर्य को अ‌र्घ्य दान के साथ सूर्योपासना का चार दिवसीय महापर्व छठ व्रत का समापन हुआ। बुधवार को छठ घाटों पर हजारों छठ व्रतियों ने पूरे उत्साह व श्रद्धा विश्वास के साथ अस्त होते भगवान सूर्य को पहला अ‌र्घ्य दिया। इसके लिए छठ घाटों पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। वहीं छठ घाट झिलमिल सितारों की रोशनी से जगमगा उठे। कई छठ घाटों पर पूजा समितियों व प्रशासन की ओर से कोविड-19 को ले सतर्कता बरतते हुए मास्क पहनने व शारीरिक दूरी का पालन करने की अपील की जा रही थी। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जगह-जगह पुलिस बल को तैनात किया गया था। छठ महाव्रत को लेकर हजारों व्रतधारी महिला-पुरुष दोपहर बाद अपने घर से सूप-दउरा में छठ पूजन सामग्री सजाकर गाजे-बाजे के साथ छठ घाट की ओर रवाना होने लगे थे।

उनके साथ उनके परिजन व मोहल्ले के लोग छठ मईया के गीत गाते हुए श्रद्धा व उमंग के साथ छठ घाट पर पहुंच रहे थे। यह सिलसिला दोपहर से लेकर शाम तक चलता रहा। देखते ही देखते छठ घाट व्रतियों व श्रद्धालुओं से भर गया। छठ घाट पर पहुंच अस्त होते भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य दान कर व्रतियों ने छठ मईया की आराधना प्रारंभ किया। – छठ गीत से गूंजते रहा वातावरण: वैसे तो छठ महाव्रत को लेकर दिन-रात वातावरण छठ गीतों से गूंजते रहा। पर शाम होते ही छठ घाट पारंपरिक छठ गीतों से गूंज उठा। कांच ही बांस की बहंगिया.., हे सुरुज देव मनसा पुराव हमार.., केलवा के पात पर., उग हो सूरज देव.. जैसे पारंपरिक छठ गीतों से कोना-कोना गूंजते रहा। व्रती पूरे रात छठ घाट पर आराधना करते रहे। पूरे रात छठी मईया की आराधना करने के बाद उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर व्रतियों ने चार दिवसीय व्रत का समापन किया।

दूधिया रोशनी से जगमगाया छठ घाट: छठ महापर्व के अवसर पर डेंगू नाला छठ घाट सहित सभी छठ घाट दूधिया रोशनी से जगमगा रहे थे। इलेक्ट्रॉनिक झालरों-बतियों की रंग-बिरंगी रोशनी से नहाए छठ घाट आकर्षण का केंद्र बने रहे। जलाशयों के पानी में लाइट की रोशनी पढ़ते ही एक अलग ही प्रकार के आनंद की अनुभूति का एहसास हो रहा था। छठी मईया के प्रति आस्था ऐसी होती है कि व्रती उनके परिवार के सदस्य छठ घाटों पर नंगे पांव पहुंचकर पूजन अर्चन करते हैं। घाट चाहे कितना दूर क्यों ना हो व्रती व उनके परिजन पैदल व नंगे पांव ही छठ घाटों पर जाकर डूबते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर छठी मईया की आराधना पूरी रात करते हैं।

घाट पर भीड़ होने के कारण अर्ध्य देने के लिए घाटों पर भीड़ लगी रही। मान्यता है कि पानी में खड़े होकर ही अर्ध्य देना है। इस नाते भी हर कोई नदी और जलाशय के पानी तक पहुंचना चाह रहा था। धक्का मुक्की के बीच किसी तरह लोगों ने भगवान भाष्कर को अर्ध्य दिया।

- Advertisement -

सब्सक्राइब करें नमस्ते कोरबा न्यूज़ YOUTUBE चैनल

5,570SubscribersSubscribe
- Advertisement -
Latest News

गर्मी शुरू होते ही बढ़ने लगे अग्नि हादसे, घटनास्थल तक दमकल पहुंचने में देरी से बढ़ रहा नुकसान; शहर के भीतर त्वरित व्यवस्था की...

गर्मी शुरू होते ही बढ़ने लगे अग्नि हादसे, घटनास्थल तक दमकल पहुंचने में देरी से बढ़ रहा नुकसान; शहर...

More Articles Like This

- Advertisement -