एक दिवाली ऐसी भी जहां अपनों का साथ छूटा, वहां अपना सेवा घर बना परिवार,अपनों से बिछड़े चेहरों पर लौटी दिवाली की मुस्कान
नमस्ते कोरबा :- वक्त और हालात ने जिन्हें अपनों से दूर कर दिया उनके जीवन में भी दीपावली की खुशियां भरने की एक आत्मीय पहल कोरबा के अपना सेवा घर आश्रम में देखने को मिली। यहां रह रहे प्रभुजनों के लिए दीपावली केवल रोशनी और आतिशबाजी का पर्व नहीं, बल्कि अपनत्व, सम्मान और परिवार जैसी खुशियों का एहसास बन गई।
आश्रम की देखरेख करने वाले सदस्यों ने पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ प्रभुजनों के बीच दीपावली मनाई। आतिशबाजी के बीच उनके चेहरों पर खिलती मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि अपनों से दूर होने का दर्द कुछ पल के लिए ही सही लेकिन स्नेह और साथ ने कम कर दिया। विशेष व्यंजनों की व्यवस्था की गई और सभी ने मिलकर दीपोत्सव की खुशियां साझा कीं।
आश्रम के सदस्यों ने यह प्रयास किया कि किसी भी प्रभुजन को इस खास दिन पर अपने परिवार की कमी महसूस न हो। उनके साथ हंसी-खुशी समय बिताया और उन्हें यह एहसास कराया कि परिवार केवल रिश्तों से नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदना और साथ से भी बनता है।
दरअसल दीपावली का असली अर्थ केवल अपने घर को रोशन करना नहीं बल्कि उन चेहरों पर भी मुस्कान लाना है, जिनकी जिंदगी से अपनों का साथ छूट गया है। अपना सेवा घर में मना यह दीपोत्सव इसी मानवीय संवेदना और सेवा भावना की एक खूबसूरत मिसाल बन गया।










