सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म,पांच वार्डों में सफाई बहाल,जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद महज 8 घंटे में ठेकेदार को भुगतान की सूचना, काम पर लौटे सफाईकर्मियों ने मंत्री, महापौर और प्रशासन का जताया आभार
नमस्ते कोरबा। तीन महीने से वेतन के इंतजार में परेशान नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद महज आठ घंटे के भीतर ठेकेदार को भुगतान की सूचना मिली और नाराज कर्मचारी काम पर लौट आए। इसके साथ ही पंडित रविशंकर शुक्ल नगर जोन के पांच वार्डों में चरमराई सफाई व्यवस्था फिर पटरी पर लौटने लगी है। कर्मचारियों की वापसी से जहां रहवासियों ने राहत की सांस ली, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की ठेका व्यवस्था और कर्मचारियों के वेतन भुगतान की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
दरअसल पंडित रविशंकर शुक्ल नगर जोन के पांच वार्डों में तैनात करीब 80 सफाई कर्मचारी पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से परेशान थे। बार-बार इंतजार और आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारियों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। गुरुवार को सभी कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर बैठ गए। इसका सीधा असर पांच वार्डों की सफाई व्यवस्था पर पड़ने लगा। नियमित सफाई नहीं होने से कचरा उठाव और स्वच्छता को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी थी।
मामले की गंभीरता सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। प्रशासनिक पहल के बाद महज आठ घंटे के भीतर संबंधित ठेकेदार को भुगतान किए जाने की सूचना कर्मचारियों तक पहुंची। इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटने का फैसला लिया। शुक्रवार से सफाई व्यवस्था दोबारा शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली।
**आभार के साथ व्यवस्था पर भी सवाल**
हड़ताल समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने जिला प्रशासन, उद्योग मंत्री और महापौर के प्रति आभार जताया। उनका कहना था कि प्रशासन की पहल से उनकी समस्या का समाधान होने का रास्ता खुला और वे दोबारा काम पर लौट सके।
हालांकि इस घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर सफाई जैसे जरूरी काम में लगे कर्मचारियों को तीन-तीन महीने तक वेतन के लिए क्यों इंतजार करना पड़ा? जब प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद महज आठ घंटे में भुगतान की सूचना मिल सकती है, तो समय रहते यह पहल क्यों नहीं की गई? शहर की सफाई व्यवस्था जिन कर्मचारियों के भरोसे चलती है, उनके वेतन की नियमितता सुनिश्चित करना नगर निगम और संबंधित ठेकेदार की जिम्मेदारी है। अब जरूरत इस बात की है कि भविष्य में ऐसी नौबत न आए और कर्मचारियों को अपने हक के वेतन के लिए हड़ताल का रास्ता न अपनाना पड़े।
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