नवरात्रि विशेष: आइए हमारे साथ करें मां कोसगाई के दर्शन,कठिन चढ़ाई अनूठी परंपरा और इतिहास समेटे मां का प्राचीन धाम

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नवरात्रि विशेष: आइए हमारे साथ करें मां कोसगाई के दर्शन,कठिन चढ़ाई अनूठी परंपरा और इतिहास समेटे मां का प्राचीन धाम

नमस्ते कोरबा : शरद नवरात्रि के साथ ही देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। इसी कड़ी में कोरबा के कोसगाई पहाड़ पर विराजमान मां कोसगाई के दरबार में भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। ऊंचे पहाड़, चारों ओर फैली हरियाली और माता के प्रति अटूट आस्था इस प्राचीन धाम को विशेष पहचान देती है। कठिन चढ़ाई के बावजूद श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ पहाड़ पर चढ़कर माता के दर्शन कर रहे हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

छुरीगढ़ की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा धाम

कोसगाई पहाड़ केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। मान्यता है कि यहां मां कोसगाई का मंदिर 16वीं शताब्दी से जुड़ा है। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक 36 गढ़ों में शामिल छुरीगढ़ की विरासत से भी जोड़ा जाता है।

16वीं शताब्दी से जुड़ा है मंदिर का इतिहास, कठिन चढ़ाई पार कर माता के दर्शन करने पहुंच रहे श्रद्धालु

स्थानीय परंपरा के अनुसार आज भी राजघराने के सदस्य यहां पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं। पहाड़ पर स्थित यह धाम अपनी प्राचीनता और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के साथ इतिहास में रुचि रखने वालों को भी आकर्षित करता है।

लाल नहीं सफेद ध्वज चढ़ाने की परंपरा

मां कोसगाई के दरबार की सबसे खास पहचान यहां खुले आसमान के नीचे विराजमान देवी और उन्हें अर्पित किया जाने वाला सफेद ध्वज है। आमतौर पर देवी मंदिरों में लाल ध्वज चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है, लेकिन यहां सफेद ध्वज अर्पित किया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार मां कुंवारी स्वरूप में विराजमान हैं और सफेद ध्वज शांति का प्रतीक माना जाता है। यही अनूठी परंपरा इस धाम को अन्य देवी मंदिरों से अलग पहचान देती है।

खजाने की मान्यता से जुड़ा है कोसगाई नाम

कोसगाई नाम को लेकर भी एक प्रचलित मान्यता है। कहा जाता है कि 16वीं शताब्दी में हैहयवंशी राजा ने यहां मंदिर की स्थापना कराई थी। लोकमान्यता के अनुसार राजा खजाना लेकर इस पहाड़ पर आए थे और उसे इसी स्थान पर रखा गया था। इसी खजाने से जोड़कर इस स्थान का नाम कोसगाई पड़ने की बात कही जाती है। हालांकि यह मान्यता स्थानीय जनश्रुतियों का हिस्सा है।

नवरात्रि के अवसर पर कोसगाई पहाड़ का वातावरण भक्तिमय हो उठा है। श्रद्धालुओं के लिए माता के दर्शन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा से जुड़ने का अवसर भी हैं। पहाड़ की कठिन चढ़ाई पार कर माता के दरबार तक पहुंचने वाले भक्तों की श्रद्धा इस प्राचीन धाम की महत्ता को और बढ़ा रही है।

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