कोरबा पुलिस की विशेष पहल साइबर सुरक्षा के साथ मानव सेवा, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने किया रक्तदान
नमस्ते कोरबा :- पुलिस की भूमिका केवल अपराध रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। जब पुलिस समाज के बीच पहुंचकर लोगों को जागरूक करती है और जरूरतमंदों के लिए रक्तदान जैसे मानवीय कार्यों में स्वयं आगे आती है तो पुलिस और जनता के बीच भरोसे का रिश्ता और मजबूत होता है। कोरबा में आयोजित साइबर चौपाल एवं रक्तदान शिविर इसी सकारात्मक सोच का उदाहरण रहा।
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के नेतृत्व में नगर निगम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में एक ओर नागरिकों को बदलते दौर के साइबर अपराधों से बचने के तरीके बताए गए, वहीं दूसरी ओर रक्तदान के माध्यम से मानव सेवा का संदेश दिया गया। खास बात यह रही कि पुलिस अधीक्षक ने स्वयं रक्तदान कर लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए आगे आने का संदेश दिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले और नगर पुलिस अधीक्षक प्रतीक चतुर्वेदी ने भी रक्तदान कर इस अभियान में सहभागिता की।

आज डिजिटल तकनीक ने जीवन को जितना आसान बनाया है, साइबर ठगी ने उतनी ही नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। फर्जी कॉल, ओटीपी के नाम पर ठगी, संदिग्ध लिंक, फर्जी एप और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाएं आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन रही हैं। ऐसे समय में साइबर चौपाल जैसी पहल केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं बल्कि लोगों को सतर्क और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है,

कार्यक्रम में नागरिकों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन गतिविधि में जल्दबाजी न करें। साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर संपर्क करना भी उतना ही जरूरी है। कुछ मिनटों की सतर्कता कई बार जीवनभर की जमा पूंजी को बचा सकती है।
दूसरी ओर रक्तदान शिविर ने यह याद दिलाया कि तकनीक के इस दौर में भी मानवता की जरूरत कम नहीं हुई है। अस्पताल में भर्ती किसी अनजान व्यक्ति के लिए दिया गया रक्त उसके और उसके परिवार के लिए जीवन की उम्मीद बन सकता है। रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों से बाहर निकलकर स्वस्थ एवं पात्र लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
पुलिस अधिकारियों का स्वयं रक्तदान करना इस संदेश को और प्रभावी बनाता है कि जनसेवा केवल शब्दों से नहीं बल्कि स्वयं आगे बढ़कर भागीदारी करने से सार्थक होती है। पुलिस जब सुरक्षा के साथ-साथ समाज के मानवीय सरोकारों से भी जुड़ती है तो उसकी कार्यप्रणाली का एक संवेदनशील और जनहितकारी पक्ष सामने आता है।
कोरबा पुलिस की यह पहल एक व्यापक संदेश देती है साइबर दुनिया में सतर्क रहें और वास्तविक जीवन में संवेदनशील। एक ओर अपनी डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएं तो दूसरी ओर रक्तदान जैसे कार्यों के माध्यम से किसी जरूरतमंद के जीवन में उम्मीद बनें।
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