एक घर के दो चिराग, बेटे की आसमानी उड़ान तो बेटी की हाईकोर्ट में पहचान
नमस्ते कोरबा : किसी परिवार की असली पहचान सिर्फ उसकी संपन्नता से नहीं बल्कि उसके बच्चों के सपनों और उन्हें पूरा करने की जिद से बनती है। कोरबा के काशी नगर निवासी लोचन राठौर और पार्वती राठौर का परिवार इसी सोच की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आया है।
एक ही घर के दो बच्चों ने अलग-अलग राह चुनी लेकिन मंजिल दोनों की एक ही रही अपने दम पर पहचान बनाना। बेटे शशांक राठौर ने महज 22 वर्ष की उम्र में पायलट बनकर आसमान की उड़ान के लिए अपने पंख मजबूत किए वहीं बेटी साक्षी राठौर ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जूनियर जुडिशल असिस्टेंट बनकर न्यायिक व्यवस्था के क्षेत्र में कदम रखा।
शशांक की कहानी बताती है कि लक्ष्य यदि कम उम्र में तय कर लिया जाए और उसके लिए लगातार मेहनत की जाए तो सपने महज सपने नहीं रहते। वर्ष 2022 में 12वीं की परीक्षा में कोरबा जिले में टॉप करने वाले शशांक ने विमानन क्षेत्र को अपना लक्ष्य बनाया और उसे हासिल करके दिखाया।
वहीं साक्षी की सफलता यह संदेश देती है कि बेटियों के सपनों को अवसर और परिवार का भरोसा मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। उच्च न्यायालय में चयन उनकी मेहनत, अनुशासन और निरंतर तैयारी का परिणाम है।
यह उपलब्धि केवल दो बच्चों की सफलता नहीं बल्कि उस परिवार की सोच और संस्कारों की भी जीत है, जिसने बच्चों को अपने सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर दिया,आज जब सफलता को अक्सर केवल अंकों और पदों से मापा जाता है, शशांक और साक्षी की कहानी याद दिलाती है कि असली सफलता अपने लक्ष्य को पहचानने और उसके लिए पूरी ईमानदारी से जुट जाने में है।
एक ही घर से निकली ये दो राहें आने वाली पीढ़ी को यही संदेश देती हैं,सपने अलग हो सकते हैं, मंजिल अलग हो सकती है लेकिन मेहनत और हौसला हो तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।









