*खबर विशेष* :- वैदिक मंत्रों के बीच शुरू हुआ शिक्षा का नया अध्याय, कलेक्टर ने यज्ञ कर कराया शाला प्रवेश

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*खबर विशेष* :- वैदिक मंत्रों के बीच शुरू हुआ शिक्षा का नया अध्याय, कलेक्टर ने यज्ञ कर कराया शाला प्रवेश

नमस्ते कोरबा :- जिले के सुदूर वनांचल देवपहरी में गुरुवार को शिक्षा और भारतीय संस्कृति का दुर्लभ संगम देखने को मिला। गौमुखी सेवाधाम द्वारा संचालित एकलव्य हायर सेकेंडरी स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ वैदिक परंपरा के अनुरूप वेदारंभ संस्कार एवं शाला प्रवेशोत्सव के साथ किया गया।

विशेष बात यह रही कि जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत स्वयं नौकुंडीय यज्ञ में शामिल हुए और 11 आहुतियां अर्पित कर छात्र-छात्राओं के शाला प्रवेश की वैदिक प्रक्रिया संपन्न कराई।

देवपहरी के एकलव्य हायर सेकेंडरी स्कूल में अनूठा वेदारंभ संस्कार • नौकुंडीय यज्ञ में 11 आहुतियां देकर विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना • जंगल-पहाड़ के बीच शिक्षा और भारतीय संस्कृति का अद्भुत संगम

जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित इस विद्यालय में विशेष रूप से संरक्षित जनजाति वर्ग के बच्चे अध्ययन करते हैं। नए शिक्षा सत्र के पहले दिन पूरे परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन की सुगंध और आध्यात्मिक वातावरण के बीच बच्चों ने अपने शैक्षणिक जीवन की नई शुरुआत की।

कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर कुणाल दुदावत ने विद्यालय का निरीक्षण किया, विद्यार्थियों, शिक्षकों और गौमुखी सेवाधाम के कार्यकर्ताओं से चर्चा कर शिक्षा व्यवस्था की जानकारी ली।

छात्र जीवन केवल पढ़ाई का समय नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण अवधि है। शिक्षा के साथ संस्कार भी उतने ही आवश्यक हैं : कलेक्टर

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्र जीवन जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। यही वह काल है, जहां अर्जित ज्ञान, अनुशासन और संस्कार भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने बच्चों से मन लगाकर अध्ययन करने, अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का समावेश विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वैदिक परंपरा के अनुरूप आयोजित शाला प्रवेशोत्सव एक प्रेरणादायी पहल है।

समारोह में बड़ी संख्या में अभिभावक भी उपस्थित रहे। उन्होंने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ बच्चों के शाला प्रवेश को भारतीय संस्कृति से जोड़ने वाला सराहनीय प्रयास बताया। गौमुखी सेवाधाम के पदाधिकारियों ने कहा कि संस्था शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों का बोध कराने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष वेदारंभ संस्कार का आयोजन करती है।

वनांचल के बीच आयोजित यह अनूठा आयोजन यह संदेश देने में सफल रहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कार, संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़कर ही उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।

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