इसरो की तकनीक से बढ़ेगा भूजल स्तर, कोरबा में शुरू हुई वर्षा जल संरक्षण की नई पहल
नमस्ते कोरबा :- हर वर्ष गर्मी के मौसम में जल संकट और लगातार गिरते भूजल स्तर की चुनौती से जूझ रहे कोरबा के लिए राहत की एक नई पहल शुरू हुई है। अब अंतरिक्ष विज्ञान की तकनीक धरती के भीतर घटते जल भंडार को बचाने में मदद करेगी। भारत सरकार, इसरो (ISRO) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) के सहयोग से नगर निगम कोरबा ने भूजल संरक्षण की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। लगभग 50 लाख रुपये की लागत से शहर के चयनित क्षेत्रों में फिल्टरयुक्त रिचार्ज पिट तैयार किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से वर्षा जल को सीधे जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा।
कोरबा में औसतन अच्छी वर्षा होने के बावजूद उसका बड़ा हिस्सा नालों और नदी-नालों के माध्यम से बहकर निकल जाता है। शहरीकरण, कंक्रीट के बढ़ते जंगल और खुले भूभाग में कमी के कारण बारिश का पानी जमीन में पर्याप्त मात्रा में नहीं समा पाता। इसका असर यह हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में शहर के कई इलाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे गया है और गर्मियों में हैंडपंप व बोरवेल जवाब देने लगते हैं।
नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे ने बताया कि इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने आधुनिक तकनीक आधारित भूजल रिचार्ज मॉडल अपनाया है। इस परियोजना के तहत ऐसे स्थानों का चयन किया गया है, जहां वर्षा जल का अधिक प्रवाह होता है। वहां विशेष फिल्टर सिस्टम से युक्त रिचार्ज पिट बनाए जा रहे हैं, ताकि मिट्टी, कचरा और अन्य अशुद्धियां अलग हो जाएं तथा स्वच्छ वर्षा जल जमीन के भीतर पहुंचकर प्राकृतिक जलभंडार को पुनर्भरित कर सके।
कोरबा जैसे औद्योगिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर के लिए भूजल संरक्षण अब केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में इसरो की तकनीक पर आधारित यह पहल शहर को जल संकट से उबारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि योजना सफल रही तो कोरबा का यह मॉडल प्रदेश के अन्य शहरों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
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