हृदय रोगियों के लिए वरदान बनी एनकेएच की कैथलैब सुविधा, अब स्थानीय स्तर पर हो रहा उन्नत हृदय उपचार
नमस्ते कोरबा। शहर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एनकेएच में कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद हृदय रोगियों को बड़े शहरों जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होने लगी हैं। इससे गंभीर मरीजों को रायपुर या अन्य महानगरों में उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ रहा और समय पर इलाज मिलने से जीवन रक्षा आसान हो रही है।
कोरबा में पहली बार 3 मरीजों में सफल एआईसीडी प्रत्यारोपण
भीषण गर्मी, अनियमित खान-पान और बदलती जीवनशैली के कारण इन दिनों हृदय संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कई लोग सीने में जलन, गैस, अपच और बेचैनी को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई मामलों में ये हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत साबित हो रहे हैं। पिछले सप्ताह एनकेएच में 15 से अधिक हृदय रोगी पहुंचे, जिनका विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में तत्काल उपचार किया गया।
रायपुर से आने वाले कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सतीश सूर्यवंशी एवं डॉ. एस.एस. मोहंती की टीम द्वारा मरीजों की जांच के बाद 5 मरीजों की एंजियोप्लास्टी और 5 मरीजों की एंजियोग्राफी की गई। इसके अलावा एक मरीज में सफलतापूर्वक पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया। विशेष उपलब्धि के रूप में कोरबा में पहली बार अब तक 3 मरीजों में एआईसीडी (ऑटोमेटिक इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर) प्रत्यारोपण भी सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
क्या है एआईसीडी?
एआईसीडी एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जिसे छाती में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह हृदय की धड़कनों पर लगातार नजर रखता है और खतरनाक अनियमित धड़कन या अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में विद्युत झटका देकर दिल की सामान्य लय बहाल करता है। यह उपकरण कई मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होता है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार मई माह में कैथलैब में 17 मरीजों की एंजियोग्राफी, 12 मरीजों की एंजियोप्लास्टी तथा एक मरीज का पेसमेकर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया गया। कैथलैब सुविधा शुरू होने के बाद से अब तक एनकेएच में 400 से अधिक एंजियोग्राफी और 200 से ज्यादा एंजियोप्लास्टी की जा चुकी हैं।
एनकेएच ग्रुप के डायरेक्टर डॉ. एस. चंदानी ने बताया कि जिले की पहली कैथलैब सुविधा शुरू होने से अब कोरबा में ही हृदय रोगों का समग्र और उन्नत उपचार संभव हो गया है। इससे मरीजों का समय, धन और अनावश्यक परेशानी बच रही है, वहीं गंभीर परिस्थितियों में तत्काल उपचार मिलने से बेहतर परिणाम भी सामने आ रहे हैं।









