डर से परे एक रिश्ता, कोरबा में मॉनिटर लिजर्ड और परिवार की अनकही दोस्ती

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डर से परे एक रिश्ता, कोरबा में मॉनिटर लिजर्ड और परिवार की अनकही दोस्ती

नमस्ते कोरबा :- भीड़ शोर और भागती दुनिया के बीच कभी-कभी ऐसी कहानियां सामने आ जाती हैं, जो इंसानियत और प्रकृति के रिश्ते को नई परिभाषा दे जाती हैं। कोरबा के पंप हाउस कॉलोनी, हसदेव नदी किनारे रहने वाला एक परिवार आज ऐसी ही एक मिसाल बन गया है।

चुम्मेद विश्वकर्मा के घर का एक अनोखा ‘मेहमान’ है एक विशालकाय मॉनिटर लिजर्ड। जिसे देखकर आम इंसान के कदम ठिठक जाएं, वही जीव इस परिवार के लिए अपनापन और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

हर दिन दोपहर के वक्त, जैसे कोई तय वादा निभाने आता हो, यह मॉनिटर लिजर्ड चुपचाप घर के आंगन में पहुंचता है। उसके लिए चावल, दाल और सब्जी तैयार रहती है। परिवार के सदस्य बिना किसी भय के उसे अपने हाथों से खाना खिलाते हैं। यह नजारा सिर्फ हैरान नहीं करता दिल को छू जाता है।

चुम्मेद की पत्नी और बच्चे, जो आमतौर पर ऐसे जीवों से दूर रहने की सलाह पाते हैं, उसी लिजर्ड के साथ बेफिक्री से वक्त बिताते हैं। उनके लिए यह कोई खतरनाक जीव नहीं, बल्कि घर का एक भरोसेमंद हिस्सा है। हालांकि मॉनिटर लिजर्ड का ठिकाना घर के बाहर पाइपलाइन के नीचे है, लेकिन दिलों की दूरी कब की खत्म हो चुकी है। यह रिश्ता अब डर पर नहीं, भरोसे पर टिका है।

आसपास के लोग आज भी इस दृश्य को देखकर सहम जाते हैं, लेकिन यह परिवार हर दिन एक नई सीख देता है कि प्रकृति के साथ तालमेल और सह-अस्तित्व ही असली समझदारी है।

यह कहानी सिर्फ कोरबा की नहीं, बल्कि उस सोच की है, जहां इंसान और जानवर के बीच की दीवारें गिर जाती हैं। जहां डर खत्म होता है… वहीं से दोस्ती की शुरुआत होती है।

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