देखिए कैसे कोरबा के जंगल बने तितलियों का सुरक्षित ठिकाना,केसला में बायो डायवर्सिटी पार्क निर्माण

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देखिए कैसे कोरबा के जंगल बने तितलियों का सुरक्षित ठिकाना,केसला में बायो डायवर्सिटी पार्क निर्माण

नमस्ते कोरबा :- खनिज संपदा के लिए पहचाने जाने वाले कोरबा जिले के जंगल इन दिनों एक अलग ही पहचान गढ़ रहे हैं। यहां की वादियों में उड़ती रंग-बिरंगी तितलियां न सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता का अहसास कराती हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन की मजबूत तस्वीर भी पेश करती हैं। ऐसे समय में जब शहरी इलाकों से तितलियां लगभग लुप्त हो चुकी हैं, कोरबा के जंगलों में उनकी बढ़ती मौजूदगी एक सकारात्मक संकेत है।

चैतुरगढ़, महादेव और कोसगाई पहाड़ क्षेत्र जैव विविधता के समृद्ध केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। किंग कोबरा, ऊदबिलाव और पैंगोलिन जैसे दुर्लभ जीवों के साथ तितलियों की 40 से अधिक प्रजातियों की उपस्थिति यह साबित करती है कि यहां का पारिस्थितिक तंत्र अभी संतुलित है। बार्न, बैरनेट, पैंसी, ब्लू पैंसी जैसी प्रजातियां इस क्षेत्र को प्राकृतिक रंगों की जीवंत प्रयोगशाला बनाती हैं।

तितलियां केवल आकर्षण का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण के स्वास्थ्य की संवेदनशील सूचक हैं। उनकी संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि जंगलों में हरियाली, जल स्रोत और जैविक संतुलन सुरक्षित है। ऐसे में इनका संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन जाता है।

वन विभाग द्वारा पुटका पहाड़ के समीप केसला में बायो डायवर्सिटी पार्क का निर्माण इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। तितलियों के अनुकूल पौधों का रोपण और उनके प्राकृतिक आवास का विकास आने वाले समय में इस क्षेत्र को ईको-टूरिज्म के मानचित्र पर भी स्थापित कर सकता है। साथ ही, पर्यटकों के लिए विकसित की जा रही सुविधाएं इस प्रयास को और मजबूत करेंगी।

इस पूरे परिदृश्य में आदिवासी समुदायों की भूमिका भी उल्लेखनीय है। उनकी प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सह-अस्तित्व की परंपरा ने इस जैव विविधता को संरक्षित रखने में अहम योगदान दिया है। यह एक ऐसा उदाहरण है, जिससे आधुनिक समाज भी सीख ले सकता है।

स्पष्ट है कि कोरबा के जंगल केवल संसाधनों का भंडार नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन की धरोहर हैं। जरूरत इस बात की है कि विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए इस संतुलन को बनाए रखा जाए। तितलियों का यह संसार हमें याद दिलाता है कि यदि प्रकृति सुरक्षित है, तो भविष्य भी सुरक्षित है।

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