कोरबा जिले में बांगो डेम के मछुआरे ठेकेदारी व्यवस्था के खिलाफ,मछुआरों और मत्स्य खेट के ठेकेदार के बीच अहम बैठक बिना किसी नतीजे के खत्म
नमस्ते कोरबा : कोरबा जिले में बांगो डेम के मछुआरे ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध मे नज़र आ रहे हैं,दरअसल मछुआरों और मत्स्य खेट के ठेकेदार के बीच आज हुई अहम बैठक भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई,
ठेकेदार का कहना है सरकार द्वारा तय दरों पर ही मछली खरीदी जाएगी, लेकिन मछुआरों का आरोप है कि ये दरें बेहद कम हैं और परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है,
ग्रामीणों का दर्द इससे और बढ़ जाता है कि बांगो डेम बनने के दौरान आस पास के गांवों की ज़मीन डुबान क्षेत्र में समा गई थी, और तब से स्थानीय निवासी डेम में मछली मारकर जीवन यापन कर रहे है,
कुछ साल सब ठीक रहा… लेकिन अब रॉयल्टी और फिर ठेकेदारी सिस्टम लागू होने से मछुआरों को अपने ही डुबान क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए ठेकेदार पर निर्भर होना पड़ रहा है, और बदले में उचित दाम भी नहीं मिल रहा। इसी बीच, ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। पहले भी टेंडर प्रक्रिया का विरोध किया गया था, लेकिन सरकार द्वारा एक ठेकेदार को लाखों रुपये में ठेका दे दिया। अब हालात ये हैं कि मछुआरे उसी ठेकेदार के अधीन काम कर रहे हैं पर कम कीमतों ने उनकी कमर तोड़ दी है,
आज की बैठक में समाधान न निकलने के बाद गांवों के मछुआरों ने खुले शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर ठेकेदारी नीति वापस नहीं ली गई और उन्हें न्यायपूर्ण दर नहीं मिली, तो जल्द ही बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएग,
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डॉ. ऋषि ( शिक्षक )









