Friday, February 27, 2026

वनवासी सामूहिक विवाह में 75 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में, स्वामी भजनानंद आश्रम केंदई में आयोजित 10 दिवसीय अनुष्ठान का समापन

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नमस्ते कोरबावैदिक मंत्रोच्चार के साथ 75 जोड़े एक साथ परिणय सूत्र में बंध गए सामूहिक विवाह का यह खास आयोजन जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर कटघोरा अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर केंदई जलप्रपात पर बने स्वामी भजनानंद वनवासी सेवा आश्रम में आयोजित हुआ. जहां जाति और समाज का भी कोई बंधन न था. रूढ़िवाद की बेड़ियां तोड़कर बेहद निचले तबके से आने वाले प्रेमी जोड़े भी सात फेरे लेकर 7 जन्मों के लिए एक हो गए. आश्रम में सामूहिक विवाह के आयोजन का यह लगातार 27 वां वर्ष है. जिसकी ख्याति ऐसी है कि अमेरिका से भी लोग कन्यादान करने पहुँचते है.

जिला मुख्यालय से 90 कि.मी.दूर कटघोरा-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग में केंदई में स्वामी भजनानंद आश्रम स्थित है। स्वामी शारदानंद सरस्वती के मार्गदर्शन में पिछले दो दशक से लगातार साल में एक बार जरूरतमंद युवक-युवतियों की शादी के लिए सामूहिक विवाह का मंडप सजाया जाता है। जोड़ों की संख्या हर साल घटती बढ़ती रहती है। इस वर्ष 75 जोड़ी स्वामी भजनानंद सेवा आश्रम मैं एक साथ परिणय सूत्र में बंधे.आश्रम के इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शादी करने वाले जोड़ों के लिए जाती और समाज का कोई बंधन नहीं होता जरूरत होती है तो बस अटूट प्रेम की. यही कारण है कि यहां इस वर्ष कई ऐसे जोड़े भी परिणय सूत्र में बंधे जोकि एक दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन वह इतने सक्षम नहीं थे कि अपने बल पर गृहस्थ जीवन की शुरुआत कर सकें. ऐसे आश्रम का यह आयोजन उनके लिए एक उम्मीद बनकर सामने आया. यहां से शादी करने वाले जोड़ों के न सिर्फ शादी का खर्च बल्कि दांपत्य जीवन शुरू करने के लिए बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी की जाती है.महायज्ञ एवं विवाह कार्यक्रम में प्रदेश व देश के विभिन्न प्रांतों से साधु संत, विद्वानों का भी आशीष प्राप्त होता है इस अवसर पर श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन भी किया गया था. विदेशों में रह रहे धर्मावलंबी जन अपने बच्चों के साथ प्रत्येक आयोजन में यहां पहुंचकर निस्वार्थ सेवा प्रदान करते हैं.बेटी के पालक के रूप में कन्यादान तो वर पक्ष की ओर से बाराती बनकर पवित्र अग्नि के समक्ष संस्कारों का निर्वहन करते हैं. वर-वधु को शुभ शुरूआत के लिए दाम्पत्य जीवन की हर आवश्यक वस्तु उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। ऐसा नहीं कि विवाह के बाद उनका कर्तव्य पूर्ण हो गया, वे जीवन पर्यंत इन जोड़ों के माता व पिता के रूप में हर जरूरत के वक्त ढाल बनकर साथ होते हैं और जीवन के संघर्ष में मजबूती से खड़े रहने हर संभव सहायता भी उपलब्ध कराते रहते हैं।आश्रम में 27 वर्षोँ से हो रहा निर्धन कन्याओं का विवाहस्वामी भजनानंद आश्रम केंदई में सेवा दे रहीं गिरिजा देवी ने जानकारी दी कि यहां लगभग 27 वर्षों से सामूहिक विवाह का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है आज यहां 75 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे है. नए जोड़े को आश्रम की ओर प्रारम्भिक आवश्यकता की जरुरी सामानों को भेंट स्वरूप दिया जाता है. आश्रम ने निर्धन कन्याओं के लिए यह आयोजन किया जाता है जो परिवार शादी करने में सक्षम नहीं और कर्ज लेने के लिए अपनी जमीन तक बेच देते है यह सब न हो इसलिए जरूरतमंद परिवार की मदद स्वामी भजनानन्द आश्रम के द्वारा की जाती है जिससे उनकी कन्याओं का विवाह हो सके.सजे-धजे वनवासी जोड़े व उनके परिजन के साथ देश-विदेश से आए पालक माता-पिता बाराती की भूमिका में अपने दायित्वों को पूरा कर संस्कारों को पूर्ण किया। इस मौके पर छ्त्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत, गौ सेवा आयोग छ्त्तीसगढ़ शासन डॉ रामसुंदर दास महंत, बोधराम कंवर, पाली तानाखार विधायक व मुख्यमंत्री अधोसंरचना उन्नयन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष तथा राज्यमंत्री मोहितराम केरकेट्टा, कटघोरा विधायक पुरषोत्तम कंवर, गौ सेवा आयोग सदस्य छ्त्तीसगढ़ शासन प्रशांत मिश्रा तथा जिले व अन्य जिलों के बड़े गणमान्य नागरिक व ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.

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