नमस्ते कोरबा :-: रंगों के त्यौहार होली की तैयारियां शुरू हो गई है। बाजारों में रंग-गुलाल और पिचकारियों की दुकानें सजाना शुरू हो गई है। हालांकि खरीददारी आगामी दिनों में प्रारंभ होगी। कोरोना के केसों में कमी आने से भी लोगों में उत्साह नजर आ रहा है।
पिछले साल कोरोना ने होली के रंग फीके कर दिए थे, लेकिन इस बार कोरोना के केसों में लगातार कमी आने से होली के पर्व के चलते लोगों में उत्साह नजर आ रहा है। लोग होली की तैयारी में जुट गए हैं। 17 मार्च को होली का दहन होगा और 18 मार्च को धुलण्डी का पर्व मनाया गया। इस दिन एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी जाएगी। कई स्थानों पर होली के डांडा पहले ही गाड़े जा चुके है।

हर्बल गुलाल की बढ़ रही डिमांड
होली पर रंग और गुलाल का उपयोग किया जाता है। रंग और गुलाल को कैमिकल डालकर तैयार किया जाता है। ऐसे में यह त्वचा को नुकसान पहुंचाने का अंदेशा बना रहता है। इसके कारण पिछले कुछ समय से हर्बल गुलाल की डिमांड बढ़ती जा रही है। इन्हें प्राकृतिक तरीके से तैयार किया जाता है। हालांकि इसका मूल्य सामान्य गुलाल से कुछ अधिक होता है।

कोरोना काल की दो साल की त्रासदी के बाद संक्रमण की दशा सुधर चुकी है। ऐसे में होली बाजार में कारोबार को लेकर व्यवसायियों में उत्साह देखा जा रहा है।17 मार्च को होलिका दहन की तिथि जैसे जैसे निकट आ रही लोगों में त्योहार के प्रति उल्लास उमड़ने लगा है। खासकर व्यवसायी वर्ग में सामानों की बिक्री को लेकर आतुरता बनी है। होली के चिल्हर सामानों के विक्रेता थोक व्यापारियों से संपर्क करने लगे हैं। होली के सामानों के व्यापारी तनुज अग्रवाल का कहना है कि बीते वर्ष की तुलना गुलाल, पिचकारी, नकली बाल, मुखौटे आदि की अधिक मांग है। सामानों की कीमत बीते साल की तरह है। संक्रमण में कमी आने से व्यवसाय अच्छी रहने की संभावना है। नई पीढ़ी के लोग रासायनिक रंगो के बजाय हर्बल कलर की मांग बढ़ी है। रंगो के बाजार के अलावा मिठाई की दुकानें भी सजने लगी हैं। मिलावटी मिठाई की संभावना देखते हुए खाद्य वा औषधि प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इधर ग्रामीण क्षेत्र क्षेत्र से आकर शहर में रहने वाले त्योहार मनाने के लिए गांव जाने की तैयारी में जुट गए हैं। वहीं ग्रामीण अंचलों में भी अब रात में ग्रामीणों द्वारा चौक-चौराहों में फाग का भी आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बुजुर्गो के साथ युवा वर्ग भी उत्साह से फाग गा रहे है। इसके लिए गांवों में फाग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य युवाओं को फाग के प्रति उत्साह व रुचि लाना है। देखा जा रहा है कि आधुनिकता के दौड़ में शामिल युवा वर्ग अब अपने त्यौहार को लेकर उतने उत्सुक नहीं रहते। जितना की एक दशक पहले तक के लोग रहते थे।









