नमस्ते कोरबा -:: अनलॉक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने 2 अगस्त से स्कूल खोलनेेेेेे की अनुमति दे दी है लेकिन छोटे बच्चों को स्कूल भेजना अभी खतरनाक है। देश के बड़े चिकित्सा विशेषज्ञों ने कोरोना के तीसरी लहर से इंकार नहीं किया है। ऐसी स्थिति में छोटे बच्चों की जान जोखिम में डालना उचित नहीं है।
भारतीय संसद और छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों को बिना वैक्सीन लगाए प्रवेश नहीं दिया जा रहा तो छोटे बच्चों को किसकी जिम्मेदारी पर स्कूल बुलाया जा रहा है। शासकीय आदेश को गलत व्याख्या कर निजी स्कूल पालकों पर दबाव बना रहे हैं कि वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सहमति दे।
छोटे बच्चे स्वास्थ्य और कोरोना गाइडलाइन के प्रति जागरूक नहीं है, इसलिए बच्चों को किसी भी प्रकार के नुकसान होने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कोरोना के डर से शासकीय कार्यालयों में अधिकारी आम जनता से दूरी बनाए रखने के लिए मिलने से परहेज कर रहे हैैं। ऐसी स्थिति में निजी स्कूलों पर निगरानी के लिए क्या उपाय किया गया है प्रशासन उसकी जानकारी दे। किसी भी स्कूल में ऐसी व्यवस्था नहीं जहां बच्चों को दो गज की दूरी पर बैठाया जा सकें।
कोरबा पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नूतन सिंह ठाकुर ने सभी पालकों से अपील की है कि वे शाला प्रबंधन को ऐसी कोई सहमति न दे जिसमें बच्चों को कुछ होने पर पालकों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
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