सड़क निर्माण में गरीबों के आशियाने न उजाड़े जाएं, जरुरत हो तो बालको की बाउंड्री पीछे खिसकाई जाए- जयसिंह अग्रवाल
नमस्ते कोरबा। बजरंग चौक-परसाभाठा (बालको) मार्ग को प्रस्तावित फोरलेन किए जाने से प्रभावित होने वाले पारसाभाठा क्षेत्र के स्थानीय निवासियों ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याओं एवं मांगों से अवगत कराया तथा ज्ञापन सौंपा।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे वर्षों से पारसाभाठा क्षेत्र में निवासरत हैं। अनेक परिवार सड़क किनारे छोटी-छोटी दुकानें एवं व्यवसाय संचालित कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। प्रस्तावित फोरलेन निर्माण की जद में यदि उनके घर एवं दुकानें आती हैं, तो सड़क बनने से पहले ही कई परिवारों के सिर से छत और हाथ से रोज़गार छिनने की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि सड़क का निर्माण और यातायात व्यवस्था में सुधार समय की आवश्यकता है, लेकिन विकास की योजना बनाते समय उन स्थानीय परिवारों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती, जो वर्षों से उसी क्षेत्र में रहकर अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। विकास का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि सड़क चौड़ी हो जाए और उसके किनारे रहने वाले गरीब एवं छोटे व्यवसायी उजड़ जाएं।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की योजना बनाते समय क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों और प्रभावित परिवारों के घरों एवं आजीविका को प्राथमिकता से ध्यान में रखा जाना चाहिए। यदि फोरलेन के लिए अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है, तो केवल स्थानीय लोगों के घरों एवं छोटी दुकानों को हटाना ही एकमात्र विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि BALCO प्रबंधन के साथ समन्वय कर प्लांट की बाउंड्रीवाल को आवश्यकतानुसार पीछे करने की संभावनाओं का भी परीक्षण किया जाए, ताकि सड़क निर्माण की आवश्यकता पूरी होने के साथ स्थानीय निवासियों के घर एवं रोजगार सुरक्षित रह सकें।
पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार और प्रशासन को सड़क की डिजाइन तथा भूमि सीमा का पुनः परीक्षण कर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिसमें विकास भी हो और किसी परिवार की आजीविका भी न उजड़े। इस विषय पर स्थानीय निवासियों की बात सुने बिना कोई अंतिम निर्णय लेना उचित नहीं होगा।
उन्होंने आश्वस्त किया कि परसाभाठा के निवासियों की इस समस्या को जनहित के मुद्दे के रूप में सक्षम स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि सड़क निर्माण के साथ प्रभावित परिवारों के हितों की भी उचित सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। “विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास ऐसा हो जिसमें सड़क भी बने और लोगों के घर-रोज़गार भी सुरक्षित रहें।”
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