“ऊर्जा नगरी बनी अंधेर नगरी”, 9 घंटे से ज्यादा अंधेरे में रहा कोरबा,देर रात हुई विद्युत व्यवस्था बहाल

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“ऊर्जा नगरी बनी अंधेर नगरी”, 9 घंटे से ज्यादा अंधेरे में रहा कोरबा,देर रात हुई विद्युत व्यवस्था बहाल

नमस्ते कोरबा :- ऊर्जा नगरी कहे जाने वाले कोरबा की हकीकत मंगलवार रात पूरी तरह उजागर हो गई जब शाम 6:30 बजे बारिश शुरू होते ही ट्रांसपोर्ट नगर, पंडित रविशंकर शुक्ला नगर, राजेंद्र प्रसाद नगर, शिवाजी नगर और एमपी नगर सहित कई इलाके घुप अंधेरे में डूब गए। हैरानी की बात यह रही कि बिजली आपूर्ति बहाल होने में करीब 9 घंटे से ज्यादा समय लग गए जिससे हजारों लोग रातभर परेशान होते रहे।

हर साल मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हल्की आंधी और बारिश भी सिस्टम की पोल खोल देती है। अगर यही हाल रहा तो बड़े मौसमीय संकट में स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी फोन तक नहीं उठे

सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि जब लोग समस्या जानने के लिए डिस्ट्रीब्यूशन केंद्र से संपर्क करने की कोशिश करते रहे, तब फोन लगातार व्यस्त या बंद मिला। यानी न सिर्फ बिजली गायब थी बल्कि जवाबदेही भी पूरी तरह गायब दिखी। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया।

‘ऊर्जा नगरी’ नाम पर उठे सवाल

विडंबना यह है कि जिस कोरबा से देश के कई राज्यों को बिजली आपूर्ति की जाती है, जहां कोयला, पानी और बिजली उत्पादन के बड़े संसाधन मौजूद हैं, वहीं की जनता अपने मूल अधिकार बिजली के लिए जूझ रही है। लोगों का कहना है कि अब “ऊर्जा नगरी” नाम भी सवालों के घेरे में आ गया है।

जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर नाराजगी

स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति भी आक्रोश देखने को मिला। उनका कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन ऐसी समस्याओं के समय कोई नजर नहीं आता। मंगलवार रात की घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि विद्युत व्यवस्था में सुधार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

समाधान की मांग तेज

शहरवासियों ने मांग की है कि विद्युत विभाग और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान दें। स्थायी समाधान, बेहतर मेंटेनेंस और पारदर्शी सूचना व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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