Sunday special : कोरबा का एक ऐसा गांव जहां अब भी चहकती है गौरैया…ग्रामीणों के प्रयास से बची नन्ही चिड़िया की दुनिया: 

Must Read

Sunday special : कोरबा का एक ऐसा गांव जहां अब भी चहकती है गौरैया…ग्रामीणों के प्रयास से बची नन्ही चिड़िया की दुनिया:

नमस्ते कोरबा :- कभी घर के आंगन में फुदक-फुदक कर चहचहाने वाली, छप्परों में घोंसले बनाने वाली और बेफिक्री से दाना चुगने वाली गौरैया अब शहरों में शायद ही नजर आती है। आबादी के बीच निश्चिंत होकर रहने वाली यह खूबसूरत चिड़िया आज विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। लेकिन कोरबा जिले के पहाड़ी क्षेत्र स्थित अरेतरा गांव में आज भी गौरैया की चहचहाहट सुनाई देती है। यहां के ग्रामीणों ने इस नन्हे परिंदे को अपने प्रयासों से संरक्षित कर रखा है।

गांव के घरों की छप्परों और पेड़ों पर बने छोटे-छोटे घोंसलों में गौरैया का बसेरा है। सुबह और शाम के समय इन नन्ही चिड़ियों की चहचहाहट से पूरा गांव गूंज उठता है। आंगन में दाना चुगती गौरैया को देखकर लोगों को वही पुराने दिन याद आ जाते हैं, जब 90 के दशक में हर घर, हर गली और मोहल्ले में इनका झुंड फुदकता नजर आता था।

समय के साथ बढ़ती आधुनिकता और कंक्रीट के जंगल ने इस नन्ही चिड़िया की दुनिया को ही बदल दिया। शहरों में पक्के मकान, बंद खिड़कियां, मोबाइल टावरों का बढ़ता जाल और रेडिएशन के प्रभाव ने गौरैया की संख्या तेजी से घटा दी। हालत यह है कि शहरी इलाकों से गौरैया लगभग गायब हो चुकी है।

लेकिन अरेतरा गांव में तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहां लगभग हर घर की छप्पर और कई पेड़ों पर गौरैया के घोंसले दिखाई देते हैं। ग्रामीण सुबह-शाम अपने आंगन में इन पक्षियों के लिए दाना डालते हैं। नन्ही गौरैया भी बिना किसी डर के आकर दाना चुगती हैं और फिर फुर्र से उड़ जाती हैं। गांव में कोई भी व्यक्ति इन पक्षियों को नुकसान नहीं पहुंचाता। यही वजह है कि यहां गौरैया की संख्या लगातार बढ़ रही है।

ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने अपने घरों की छतों और पेड़ों को इस तरह सुरक्षित रखा है ताकि गौरैया आसानी से घोंसला बना सके। गांव में बच्चों को भी इन पक्षियों की सुरक्षा के बारे में जागरूक किया गया है।

आज जब शहर और गांव दोनों ही तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदलते जा रहे हैं, ऐसे समय में अरेतरा गांव की यह पहल उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। यहां गौरैया की वापसी कोई चमत्कार नहीं, बल्कि लोगों की संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का परिणाम है।

अगर इसी तरह के प्रयास देश के अन्य हिस्सों में भी किए जाएं, तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे आंगन में फिर से गौरैया की मीठी चहचहाहट सुनाई देगी।

Read more :- कोरबा के मुख्य मार्ग पर बीच सड़क पर ‘स्टंटबाज़ी’ पड़ी महंगी, वायरल वीडियो ने कटवा दिया 4500 का चालान

कोरबा में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की नई सौगात, शिवाय हॉस्पिटल का हुआ भव्य शुभारंभ 

- Advertisement -

सब्सक्राइब करें नमस्ते कोरबा न्यूज़ YOUTUBE चैनल

5,570SubscribersSubscribe
- Advertisement -
Latest News

कोरबा के मुख्य मार्ग पर बीच सड़क पर ‘स्टंटबाज़ी’ पड़ी महंगी, वायरल वीडियो ने कटवा दिया 4500 का चालान

कोरबा के मुख्य मार्ग पर बीच सड़क पर ‘स्टंटबाज़ी’ पड़ी महंगी, वायरल वीडियो ने कटवा दिया 4500 का चालान नमस्ते...

More Articles Like This

- Advertisement -