नगर निगम के अधिकारियों की दरियादिली से बदसूरत होता वीआईपी एरिया और शहर,निगम ने दे रखी है अतिक्रमण करने की छूट

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नगर निगम के अधिकारियों की दरियादिली से बदसूरत होता वीआईपी एरिया और शहर,निगम ने दे रखी है अतिक्रमण करने की छूट

नमस्ते कोरबा : कोरबा नगर निगम के अधिकारियों की दरियादिली से बदसूरत होता वीआईपी एरिया और शहर। लाखों की वाल पेंटिंग, करोड़ो का फुटपाथ बेतहाशा कब्जा में। निगम ने दे रखी है अतिक्रमण करने और सड़क पर ठेला-खोमचा, पसरा व दुकान लगाने की छूट, पूरा कचरा सड़क किनारे और नाली नाला में ये लोग फेंक रहे हैं और आम जनता टैक्स के साथ सफाई का सरचार्ज दे देकर परेशान है फिर भी शहर गन्दा है।

अभियान के नाम पर सिर्फ और सिर्फ दिखावा

अभियान के नाम पर सिर्फ और सिर्फ दिखावा ही हो रहा है। कुआं भट्ठा के बाद जैन चौक, बुधवारी मार्ग , घंटाघर मार्ग आखों से देखकर कब्जा करने की छूट दे दी गई है। पहले एक पसरा लगा, फिर दूसरा, और अब कई ठेले और इनका सामान सड़क तक फैलने लगा है क्योंकि कुर्सी वाले साहब को कुछ करना नहीं है। सड़क पर दुकान के कारण बीच रोड तक गाड़ियां खड़ी कर खरीदारी करने वाले हादसों को निमन्त्रण देते हैं।

जैन चौक से सफेद हाथी बने फूटपाथ.तक तो जैसे कि कब्जादारो ने सड़क भी खरीद लिया

जैन चौक से सफेद हाथी बने फूटपाथ तक तो जैसे कि कब्जादारो ने सड़क भी खरीद लिया है। न कोई कानून न व्यवस्था, सिर्फ और सिर्फ दिखावा है। ये लोग बुधवारी बाजार को पूरा गन्दा कर रखे हैं। अगर चापलूस किस्म के अधिकारियों पर भरोसा करना छोड़कर अधिकारी खुद अचानक देखने पहुंचे तो शायद उन्हें इस बात का आभास हो जाए कि मजबूरी की आड़ में किस तरह से दबंगई की जा रही है….।

प्रशासन की निष्क्रियता जो अवैध कब्जाधारी बढ़ते जा रहे हैं और आंख भी दिखा रहे हैं

निष्क्रियता प्रशासन की है जो अवैध कब्जाधारी बढ़ते जा रहे हैं और आंख भी दिखा रहे हैं। 5 से 7 लाख का पौनी पसारी तो गप शप केंद्र और नशेड़ियों का अड्डा बन गया है फिर कैसा प्रशासन जो व्यवस्था दुरुस्त नहीं कर पा रहा। तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा अपने अधिकारियों.वर्षोँ से जमे निष्क्रिय अधिकारियों को सही कहते थे कि जब मुझे यह सब दिख रहा है तो आप सबको क्यों नहीं दिखता।

शहर के लिए नासूर बन चुकी समस्या पर नेता भी खामोश

शहर का कोई भी ऐसा इलाका नहीं बचा है जो अतिक्रमण की भेट ना चढ़ा हो, लेकिन शहर के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की खामोशी भी सवालों के घेरे में है, जनप्रतिनिधि चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का कोई भी इस समस्या को लेकर कभी आवाज उठाते नजर नहीं आ रहे मानो जैसे इनका भी मौन संरक्षण शहर में अतिक्रमण करने वालों को मिल रखा हो,

ऐसा लगने लगा है कि शहर में अंगद का पांव बने अधिकारी व्यवस्था बनाने की नहीं बल्कि बिगाड़ने की तनख्वाह ले रहे हैं।

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