Monday, February 16, 2026

हाईकोर्ट की निगम आयुक्त के ईगो पर तल्ख टिप्पणी…यह तो बड़ा मजाक है, ना अस्पताल बन पाया ना पार्किंग

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हाईकोर्ट की निगम आयुक्त के ईगो पर तल्ख टिप्पणी…यह तो बड़ा मजाक है, ना अस्पताल बन पाया ना पार्किंग

नमस्ते कोरबा : नगर पालिक निगम कोरबा की आयुक्त के द्वारा मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण कर रही ठेका कंपनी को ब्लैक लिस्ट कर देने और अमानत राशि राजसात करने के मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के कथन को सुनते हुए मुख्य न्यायाधीश ने व्यवस्था और कोरबा निगम आयुक्त प्रतिष्ठा ममगाई पर तल्ख टिप्पणी की है।

मल्टी लेवल पार्किंग साहित कई सालों से अधर में लटकी परियोजना को ट्रैक पर लाने के लिए कोरबा नगर निगम आयुक्त ने निर्माण कार्य के ठेकेदार मे.विकास कंस्ट्रक्शन कंपनी की एस.डी. व पी.जी. की राशि राजसात करते हुए ठेका निरस्त कर दिया था और शेष निर्माण कार्य पूरा करने पुनः निविदा जारी कर दी थी। साथ ही ठेका कंपनी को निगम में कार्य करने से 1 साल के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था।

हमेशा की तरह निगम प्रशासन ने ठेकेदार को नोटिस देने के पश्चात भी ठेकेदार द्वारा कार्य शुरू नहीं करने की बात कही। इसके विरोध में ठेकेदार कंपनी ने उच्च न्यायलय में याचिका दायर करते हुए कहा की निगम की कार्यवाही गलत है। निगम ने बिना कंपनी का पक्ष सुने ही उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया। कंपनी ने अपनी याचिका में कहा की उसने नोटिस का जवाब दिया था जिसे निगम प्रशासन द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया। निर्माण कार्य में हुई लेट लतीफी के लिए ठेकेदार ने जिला प्रशासन को ही दोषी ठहराया है।

ठेकेदार का कहना है की ठेका पार्किंग बनाने का हुआ था जिसके अनुरूप वह कार्य कर रहा था। तत्पश्चात जिला प्रशासन द्वारा पार्किंग में अस्पताल बनाने की योजना बना दी गई। अब फिर जिला प्रशासन उसे पार्किंग का ही निर्माण करने निर्देशित कर रहा है। कंपनी ने यह भी कहा की ठेका 2017 है, निगम द्वारा उसे पुराने रेट में ही कार्य करने कहा जा रहा है जो की वर्तमान में उसके लिए संभव नहीं है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा व न्यायाधीश बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच में हो रही थी। दोनों पक्षों की दलील सुनकर मुख्य न्यायाधीश सिन्हा शासकीय अधिवक्ता पर जमकर बरसे। प्रशासन द्वारा पार्किंग में अस्पताल बनाने फिर पुनः उसे पार्किंग बनाने की बात पर श्री सिन्हा ने नाराजगी जताई।

उन्होंने प्रशासन का पक्ष रख रहे शासकीय अधिवक्ता को खरी खोटी सुनाते हुए कहा ” आप लोगों ने मजाक बना रखा है। पार्किंग का निर्माण करवाते हो और फिर कहते हो की अस्पताल बना दो। पार्किंग में अस्पताल बन सकता है क्या ? वो भी तब जब 70% कार्य हो चूका है और उसका भुगतान भी किया जा चूका है। उन पैसों का क्या होगा ? जनता के पैसों को बर्बाद किया जा रहा है। आपकी जेब से इन पैसों की भरपाई करवाऊंगा”। न्यायालय ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह का समय देते हुए प्रकरण में शपथ पत्र दायर कर अपना पक्ष रखने निर्देशित किया है।

कार्य DMF मद का होने के कारण सीधा कलेक्टर कार्यालय के अधीन था पर हैरानी की बात थी की वर्ष 2020 से 2024 तक निर्माण कार्य बंद रहने के बावजूद हर सप्ताह होने वाली समय सीमा की बैठक में ठेकेदार पर किसी प्रकार की कार्यवाही नही की गई। 4 सालों तक जिला प्रशासन केवल नई नई घोषणाएं करता रहा, कभी अस्पताल बनाने की तो कभी काम्प्लेक्स।

प्रदेश में सरकार बदलते ही प्रशासन के तेवर भी बदल गए। छवि चमकाने फाइलें दौड़ाई गई। नव पदस्थ निगम आयुक्त ने मामले में सख्ती तो दिखाई पर आस्तीन के साँप रुपी अपने अधिकारीयों की कारगुजारी से अनजान अब न्यायपालिका की कार्यवाहियों का दंश झेल रहीं हैं। बहरहाल यह पूरा मामला व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धी का है जहाँ कोई बेदाग नही। इसमें दोनों ही पक्ष फायदे में रहे और नुकसान कोरबा की निर्दोष जनता को उठाना पड़ा।

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