Tuesday, February 24, 2026

*कोरबा में कोरोना के आंकड़े बढ़ रहे हैं,अभी भी वक्त है संभल जाइए बिना मास्क के ना निकले घरों से*

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नमस्ते कोरबा :-: आख़िर तो हम इंसान ही हैं न ! तो हम क्यों सुधरें? यह बातें कोरबा की जनता शत प्रतिशत सही साबित करने में जुटी हुई है, लगभग 2 वर्षों से कोरोनावायरस का प्रकोप झेल रहे हैं,फिर भी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. कोरोना महामारी की विभीषिका वहीं परिवार समझ रहा है जिन्होंने अपने किसी को इस महामारी की चपेट में खोया है.कोरोना अपनी दूसरी जबरदस्त पारी खेल कर कुछ शांत हुआ ही था कि तीसरी पारी के लिए हम और आप सब ने मिलकर उसे आमंत्रित कर दीया हैं और लोग छप्पन भोग के बिना जिन्दगी कैसी के तर्ज पर सरकार और तंत्र को ठेंगा दिखाने में मस्त है,

बाजारों में उमड़ रही भीड़ किसी को नहीं है कोरोना की चिंता

जिला प्रशासन और नगर निगम बार बार मुनादी करवा रही है कि खुद सुरक्षित रहें और समाज को भी सुरक्षित करें। पर क्या फायदा? लोगों ने इसका जिम्मा भी प्रशासन पर ही थोप दिया। प्रशासन अपने स्तर से भरपूर प्रयास कर रही है लोगों को इस संक्रमण से बचाया जा सके। नगर निगम युद्ध स्तर पर सफाई, सेनेटाइजेशन, फॉगिंग इत्यादि करवा रहा है। परन्तु कुछ मामलों में विफल है। मुर्गा, मिट एवं मछली के अवशिष्टों को यत्र – तत्र सड़क किनारे फेंका जा रहा है। इसे रोकने के लिए नगर निगम को इस तरह के अवैध दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

लोगों ने अब कसम खा ली है कि भले ही कोरोना से संक्रमित हो जाए, लेकिन मास्क नहीं लगाएंगे और दो गज की दूरी भी नहीं रखेंगे। वाहनों में इसी तरह के हालात बने हुए हैं। बाजार में भी घोर लापरवाही देखी जा रही है। व्यापारियों को भी इसके लिए सख्त और अनुशासित होने की आवश्यकता है।

अक्सर यही देखने को मिल रहा है कि कोरोना संक्रमण का दूसरा दौर खत्म होते-होते लोगों ने लापरवाही का दामन फिर से थामना शुरू कर दिया था। बाजार हो या कामकाज का स्थल, लोगों ने मास्क पहनना, मुंह को नाक तक ढंकना, सेनेटाईजर का इस्तेमाल और सामाजिक दूरी को नजरअंदाज कर दिया है। भीड़-भाड़ वाले स्थानों में न तो प्रशासन और न ही संबंधित प्रतिष्ठान, व्यवसायी, संचालकगण भी पालन कराने पर जोर दे रहे हैं और न ही प्रशासन का मैदानी अमला इसके प्रति गंभीरता दिखा रहा है। लापरवाही का चोला ओढ़कर आम जनता फिर से संक्रामक बीमारी को निमंत्रण दे चुकी है जिस पर प्रशासन की सख्ती अभी से बरतना जरूरी हो चला है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने में बरती जा रही शिथिलता बाजारों से लेकर खान-पान वाले स्थलों, चौपाटी में भी सहज ही नजर आ जाती है किन्तु सरकारी तंत्र शाम 5 बजे के बाद अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेता है, जिस वजह से इस वक्त उल्लंघन कुछ ज्यादा ही देखने को मिलता है। वैसे भी कामकाज के समय में भी सरकारी तंत्र की उदासीनता ढिलाई किसी से छिपी नहीं है। आम जनता जो नियमों का उल्लंघन कर रही है, उसे सख्ती की आदत पड़ चुकी है किन्तु प्रशासन की उदारता एक बार फिर महंगी पड़ रही है। चौपाटी और बाजार एक ऐसी जगह है जहां बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों का जमावड़ा होता है किन्तु ऐसे भीड़भाड़ वाले स्थलों में भी दुकानदारों से लेकर अधिकांश ग्राहकों में मास्क, सेनेटाईजर और सामाजिक दूरी बिल्कुुल भी नजर नहीं आती। जिला प्रशासन एवं अधीनस्थ इकाईयों को जरूरत है कि अभी से नियमों व निर्देशों का सख्ती से पालन कराएं तो आगामी दिनों में हालात बिगड़ने से काफी हद तक रोका जा सकेगा।

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