*नहीं हो रहा मंगलवार सप्ताहिक लॉकडाउन का पालन,लोगों की मनमानी चरम पर*

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नमस्ते कोरबा :-: कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर ओमिक्रॉन के रूप में खतरे की घंटी बजा चुकी है। विश्व के विभिन्न देशों सहित भारत और इसके राज्यों में प्रारंभिक तौर पर मामले मिलने शुरू हो गए हैं। हालांकि ओमिक्रॉन का खतरा अपेक्षाकृत अभी बढ़ा नहीं है किन्तु परिवारों से लेकर स्कूलों में जिस तरह से कोरोना संक्रमण से प्रभावित लोग/बच्चे मिलने लगे हैं उससे यह ज्यादा जरूरी हो चला है कि सुरक्षात्मक उपायों को अपनाने पर गंभीरता से जोर दिया जाए।

मंगलवार को साप्ताहिक लॉकडाउन का मनमाना पालनकलेक्टर के द्वारा मंगलवार को जिले के सभी नगरीय निकाय क्षेत्रों में एक दिन का साप्ताहिक लॉकडाउन (व्यावसायिक अवकाश) घोषित किया गया है। इस निर्देश का पालन करने में छोटे-बड़े व्यवसायी एक-दूसरे की देखा-देखी कोताही बरत रहे हैं तो दूसरी ओर प्रशासन अपनी सख्ती सिर्फ कागजों पर ही दिखा रही है। दवा दुकानों को छोड़कर सभी तरह के स्थाई-अस्थाई दुकानों को बंद रखना है। मंशा है कि एक दिन किसी का संपर्क किसी भी बाहरी व्यक्ति से न हो ताकि कोरोना संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके। इसका पालन करने की जिम्मेदारी जहां आम जनता से लेकर समस्त व्यापारीगणों की है वहीं सख्ती से पालन कराने का दायित्व प्रशासनिक अमले का भी है। नियमों के पालन में नाता-रिश्ता, भाई-भतीजावाद, जान-पहचान वालों को छोड़ दिया जाए तो कोई संदेह नहीं कि कार्यवाही का विरोध होगा।

यही देखने को मिल रहा है कि कोरोना संक्रमण का दूसरा दौर खत्म होते-होते लोगों ने लापरवाही का दामन फिर से थामना शुरू कर दिया। बाजार हो या कामकाज का स्थल, लोगों ने मास्क पहनना, मुंह को नाक तक ढंकना, सेनेटाईजर का इस्तेमाल और सामाजिक दूरी को नजरअंदाज कर दिया है। भीड़-भाड़ वाले स्थानों में न तो प्रशासन और न ही संबंधित प्रतिष्ठान, व्यवसायी, संचालकगण भी पालन कराने पर जोर दे रहे हैं और न ही प्रशासन का मैदानी अमला इसके प्रति गंभीरता दिखा रहा है। लापरवाही का चोला ओढ़कर आम जनता फिर से संक्रामक बीमारी को निमंत्रण दे रही है जिस पर प्रशासन की सख्ती अभी से बरतना जरूरी हो चला है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराने में बरती जा रही शिथिलता बाजारों से लेकर खान-पान वाले स्थलों, चौपाटी में भी सहज ही नजर आ जाती है किन्तु सरकारी तंत्र शाम 5 बजे के बाद अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेता है, जिस वजह से इस वक्त उल्लंघन कुछ ज्यादा ही देखने को मिलता है। वैसे भी कामकाज के समय में भी सरकारी तंत्र की उदासीनता ढिलाई किसी से छिपी नहीं है। आम जनता जो नियमों का उल्लंघन कर रही है, उसे सख्ती की आदत पड़ चुकी है किन्तु प्रशासन की उदारता एक बार फिर महंगी पड़ सकती है। चौपाटी और बाजार एक ऐसी जगह है जहां बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों का जमावड़ा होता है किन्तु ऐसे भीड़भाड़ वाले स्थलों में भी दुकानदारों से लेकर अधिकांश ग्राहकों में मास्क, सेनेटाईजर और सामाजिक दूरी बिल्कुुल भी नजर नहीं आती। जिला प्रशासन एवं अधीनस्थ इकाईयों को जरूरत है कि अभी से नियमों व निर्देशों का सख्ती से पालन कराएं तो आगामी दिनों में हालात बिगड़ने से काफी हद तक रोका जा सकेगा।

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