मुख्यमंत्री की घोषणानुरूप पंडित माधव राव सप्रे की याद में सर्वसुविधायुक्त प्रेस क्लब भवन निर्माण एवं प्रतिमा स्थापना का कार्य शीघ्र होगा पूरा – जयसिंह अग्रवाल

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नमस्ते कोरबा :: हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता के पुरोधा माधव राव सप्रे का नाम साहित्य जगत में द्वैदीप्यमान नक्षत्र के रूप में सदैव चमकता रहेगा। 19 जून 1871 को दमोह जिले में जन्मे माधवराव सप्रे ने मिडिल स्कूल तक की शिक्षा बिलासपुर से और मैट्रिक तक रायपुर से शिक्षा ग्रहण करने के बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से वर्ष 1899 में बी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण किया। ब्रिटिश काल में सप्रे जी की योग्यता और प्रतिभा को देखते हुए उन्हें तहसीलदार की नौकरी का प्रस्ताव मिला परन्तु देश भक्ति से ओत-प्रोत सप्रे जी ने अंग्रेजों के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। सप्रे जी ने देश सेवा के संकल्प को पूरा करना अधिक उपयुक्त समझा। अपनी लेखन कला के माध्यम से वे देश सेवा करना चाह रहे थें लेकिन उस समय समूचे छत्तीसगढ़ में कोई भी प्रिंटिंग प्रेस उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद भी उन्होंने लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने कार्य जारी रखते हुए देश सेवा के जज्बे को जीवित रखा।  
सप्रे जी ने देश सेवा के लिए लेखन और पत्रकारिता को माध्यम बनाते हुए बिलासपुर के छोटे से गांव पेंड्रा में वर्ष 1900 में प्रिंटिंग प्रेस स्थापित किया और ‘‘छत्तीसगढ़ मित्र‘‘ नाम से मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ किया। कालांतर में सप्रे जी ने लोकमान्य तिलक के मराठी केशरी को हिन्दी केशरी के रूप में यहां से हिन्दी में प्रकाशित करना आरंभ कर दिया। इस पत्रिका ने हिन्दी साहित्य प्रेमियों और पत्रकारों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
इस अवसर पर यह बताते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है कि माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने 7 जनवरी, 2021 को अपने पेण्ड्रा प्रवास के दौरान स्थानीय पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल की मांग पर पंडित माधव राव सप्रे जी के नाम को यादगार बनाए रखने के लिए सर्वसुविधायुक्त प्रेस क्लब भवन का निर्माण एवं प्रतिमा की स्थापना करने की घोषणा की है। आज पंडित माधव राव सप्रे जी की 150वीं जयंती के अवसर पर मैं उन्हे सादर नमन करता हूं।

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