दिव्यांग आदिवासी युवक का मिट्टी का घर भरभराकर ढहा,परिवार पड़ोसी के घर रहने मजबूर,बारिश ने छीना आशियाना, अब मदद की आस
नमस्ते कोरबा:- लगातार बारिश के बीच मुड़धोवा गांव में एक दिव्यांग आदिवासी युवक के परिवार पर ऐसी आफत टूटी कि सिर छिपाने के लिए अपना घर तक नहीं बचा। रात में अचानक मिट्टी का मकान भरभराकर गिर पड़ा और देखते ही देखते जॉन मिंज का आशियाना मलबे में बदल गया। गनीमत रही कि इस हादसे में परिवार के किसी सदस्य की जान नहीं गई, लेकिन घर के साथ उनकी उम्मीदों की छत भी ढह गई।
जॉन मिंज पहले से ही बेहद गरीबी में मिट्टी के कच्चे मकान में परिवार के साथ गुजर-बसर कर रहे थे। बारिश शुरू होने के बाद कमजोर हो चुके घर को लेकर परिवार के मन में डर बना रहता था। आखिरकार रात में वही डर हकीकत बन गया और पूरा मकान अचानक ढह गया। कुछ ही पलों में वह घर, जो परिवार के लिए तमाम मुश्किलों के बीच एकमात्र सहारा था मलबे में तब्दील हो गया।
अपना घर उजड़ा, पड़ोसी के घर मिली पनाह
मकान गिरने के बाद परिवार के पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची। जॉन मिंज अपने परिवार को लेकर अब पड़ोसी के घर में रहने को मजबूर हैं। कल तक जिस घर में उनका परिवार किसी तरह जिंदगी गुजार रहा था, आज उसी जगह मलबा पड़ा है। बारिश के बीच परिवार के सामने कपड़े, सामान और जरूरी चीजों को सुरक्षित रखने से लेकर रात गुजारने तक की चिंता बनी हुई है।
दिव्यांग होने के कारण जॉन मिंज के लिए यह संकट और भी बड़ा हो गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि वह अपने दम पर नया मकान खड़ा कर सके। मदद की उम्मीद में परिवार कभी अधिकारियों की ओर देखता है तो कभी आसमान की ओर, लेकिन फिलहाल दोनों ओर से इंतजार ही हाथ लगा है।
शिकायत के बाद भी मदद का इंतजार
मकान ढहने की घटना की जानकारी देने और मदद की गुहार लगाने के बावजूद पीड़ित परिवार को अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बारिश में आशियाना खो चुके इस जरूरतमंद परिवार की सुध आखिर कौन लेगा?
जॉन मिंज और उनका परिवार अब प्रशासन से तत्काल राहत और रहने के लिए सुरक्षित आवास की उम्मीद लगाए बैठा है। जिस परिवार के पास कभी मिट्टी की ही सही, अपनी एक छत थी, आज वह छत भी नहीं है। बारिश की हर बूंद उनके लिए मौसम नहीं, बल्कि बेघर होने की पीड़ा लेकर आ रही है।









