देखिए कांस के फूलों ने दे दी बड़ी खबर! कोरबा में बिछी सफेद चादर,अब बदलने वाला है मौसम
नमस्ते कोरबा :- कुछ मौसम कैलेंडर की तारीख देखकर नहीं आते बल्कि प्रकृति खुद उनके आने की खबर देती है। खेतों की मेड़ों पर झूमते कांस के सफेद फूल भी ऐसा ही एक संकेत हैं। कोरबा की धरती पर इन दिनों जहां नजर जाती है वहां हरियाली के बीच कांस की सफेदी दिखाई दे रही है। नदी-नालों के किनारे से लेकर खेतों की मेड़ों तक खिले ये फूल मानो कह रहे हैं बरसात अब विदा होने को है और गुलाबी ठंड दस्तक देने लगी है।
बारिश से धुली धरती पहले ही अपने सबसे खूबसूरत रूप में है। खेतों में लहलहाती फसल, गीली मिट्टी की सोंधी खुशबू, पेड़-पौधों पर चढ़ी ताजगी और चारों ओर फैली हरियाली मन को सुकून देती है। इसी बीच कांस के फूलों की सफेद चादर ने इस प्राकृतिक सौंदर्य में जैसे चार चांद लगा दिए हैं।
जहां नजर पड़ी वहीं कांस की सफेदी
डिंगापुर, बालको, तिलकेजा सहित जिले के कई मैदानी इलाकों में कांस के फूल इन दिनों प्रकृति का श्रृंगार कर रहे हैं। खेतों की मेड़ों पर खड़े कांस के पौधे हवा के साथ लहराते हैं तो ऐसा लगता है जैसे सफेद फूलों की कोई नदी बह रही हो। नदी और नालों के किनारे इनका झुरमुट दूर से ही लोगों का ध्यान खींच रहा है।
सुबह की हल्की धूप में कांस के फूलों की सफेदी और भी निखर जाती है। हवा का झोंका आते ही फूल एक साथ लहराने लगते हैं। प्रकृति का यह दृश्य इतना सहज और सुंदर है कि राह चलते लोग भी कुछ पल ठहरकर इसे निहारने और मोबाइल कैमरे में कैद करने से खुद को रोक नहीं पा रहे।
कांस का खिलना सिर्फ खूबसूरती नहीं संकेत भी है
ग्रामीण अंचलों में कांस के फूलों को मौसम बदलने का प्राकृतिक संकेत माना जाता है। भादो के आसपास कांस के फूल खिलने लगते हैं और इनके साथ बारिश के कमजोर पड़ने की उम्मीद जुड़ी रहती है। इसके बाद धीरे-धीरे मौसम में बदलाव महसूस होने लगता है। बारिश की रफ्तार कम होती है आसमान कुछ साफ रहने लगता है और सुबह-शाम वातावरण में हल्की ठंडक महसूस होने लगती है। यानी प्रकृति की भाषा समझने वालों के लिए कांस का खिलना एक तरह का संदेश है अब मानसून अपने अंतिम पड़ाव की ओर है।
हरियाली पर चढ़ी सफेदी की चादर
कोरबा की पहचान सिर्फ उद्योग और खनिज संपदा से नहीं बल्कि इसकी प्राकृतिक खूबसूरती से भी है। बारिश के बाद जिले का ग्रामीण और मैदानी इलाका हरियाली से भर उठता है। इसी हरे परिदृश्य के बीच कांस के सफेद फूलों का खिलना एक अलग ही रंग पैदा करता है। एक ओर हरे-भरे खेत और दूसरी ओर सफेद कांस की कतारें यह दृश्य किसी चित्रकार की बनाई तस्वीर जैसा लगता है। खासकर सुबह और शाम के समय यह नजारा और भी मनमोहक हो जाता है।
अब त्योहारों के मौसम की आहट
कांस के फूलों के साथ मौसम ही नहीं बल्कि माहौल भी बदलने लगता है। बारिश के बाद आने वाले त्योहारों की तैयारियां शुरू होती हैं। बाजारों में धीरे-धीरे रौनक बढ़ती है और घरों में भी उत्सवी माहौल की शुरुआत होने लगती है। आने वाले दिनों में नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे पर्व वातावरण को और रंगीन करेंगे।
ऐसे में कांस के फूल इस बदलाव के प्राकृतिक दूत की तरह नजर आते हैं। उनकी सफेदी में बरसात की विदाई है हवा की ठंडक में आने वाली गुलाबी ठंड का एहसास है और खेतों की हरियाली में नई उम्मीद दिखाई देती है।
प्रकृति की अपनी घड़ी
आज जब मौसम का अनुमान लगाने के लिए आधुनिक तकनीक और मौसम विभाग की सूचनाएं हमारे पास हैं, तब भी प्रकृति अपने संकेत देना नहीं भूली है। कांस का खिलना उन्हीं संकेतों में से एक है। गांवों में पीढ़ियों से लोग इन प्राकृतिक बदलावों को देखकर मौसम का अंदाजा लगाते आए हैं।
कोरबा में इन दिनों खिले कांस के फूल भी इसी परंपरा को जीवंत करते नजर आ रहे हैं। वे बिना कुछ कहे मौसम की कहानी सुना रहे हैं बारिश की रफ्तार थमने लगी है, हवा बदल रही है और त्योहारों के साथ गुलाबी ठंड का मौसम अब ज्यादा दूर नहीं। कांस की यह सफेदी इसलिए खास है क्योंकि यह केवल फूल नहीं… बदलते मौसम की वह खूबसूरत दस्तक है जिसे प्रकृति खुद अपनी भाषा में लिखती है।









