कोरबा का रहस्यमयी भटगांव: जहां घरों के दरवाजे सामने नहीं खुलते, डर और इतिहास की अनकही कहानी,देखिए वीडियो
नमस्ते कोरबा :- कोरबा मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित भटगांव आज भी एक अनोखी पहचान के साथ जाना जाता है। यह गांव किसी आधुनिक वास्तुशास्त्र से नहीं, बल्कि सदियों पुराने डर, लोककथाओं और अनुभवों से गढ़ा गया है। यहां की गलियों से गुजरते ही पहली नजर में ही कुछ अलग सा महसूस होता है क्योंकि अधिकांश पुराने मकानों में सामने की ओर कोई दरवाजा ही नहीं दिखाई देता।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा कोई शौक नहीं बल्कि मजबूरी से जन्मी थी। करीब डेढ़ सौ साल पहले गांव में अदृश्य शक्तियों और जंगली जानवरों का खौफ फैला हुआ था। शाम ढलते ही जंगल से निकलकर हिंसक जानवर गांव में घुस आते थे तो वहीं लोगों का विश्वास था कि प्रेत आत्माएं घरों में प्रवेश कर उत्पात मचाती थीं। डर इतना गहरा था कि ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक कर एक बड़ा फैसला लिया अब से हर घर का दरवाजा पीछे की ओर ही बनाया जाएगा।
इस फैसले के बाद लोगों को मानसिक सुकून मिला। धीरे-धीरे यह परंपरा गांव की पहचान बन गई। दशकों पुराने कच्चे मकान आज भी उसी बनावट के साथ खड़े हैं, जिनके सामने की दीवारें बिना दरवाजे के रहस्य बयां करती हैं। न दरवाजे, न नेम प्लेट बस खामोश दीवारें और उनके पीछे छिपी कहानियां।
आज भले ही नई पीढ़ी शहरी शैली में मकान बनवा रही हो, लेकिन पुराने लोग अब भी उस अनदेखे डर से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं। उनका मानना है कि परंपरा से हटना अनहोनी को बुलावा देना है।
भटगांव के आगे प्रसिद्ध परसाखोला पिकनिक स्पॉट स्थित है, जहां जाने वाले पर्यटक इसी रास्ते से गुजरते हैं। गांव की गलियों से गुजरते वक्त मकानों की अनोखी बनावट उन्हें हैरान कर देती है। कई लोग रुककर पूछते हैं“यहां घरों के दरवाजे सामने क्यों नहीं हैं?” और यहीं से भटगांव की रहस्यमयी कहानी एक बार फिर जिंदा हो उठती है।
भले ही आज विज्ञान और आधुनिक सोच इन मान्यताओं को चुनौती देती हो, लेकिन भटगांव की यह परंपरा अब भी लोगों की जिज्ञासा, रोमांच और रहस्य का केंद्र बनी हुई है। यह गांव केवल एक बस्ती नहीं, बल्कि डर, विश्वास और इतिहास की ऐसी कहानी है, जो हर गुजरने वाले को सोचने पर मजबूर कर देती है,क्या सच में कभी यहां अदृश्य शक्तियों का साया था, या यह सिर्फ पीढ़ियों से चला आ रहा एक डर है, जो आज भी दीवारों में कैद है?
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