स्व. बिसाहूदास महंत को उनकी 97वीं जयंती के अवसर पर याद किया जिला कांग्रेस के सदस्यों ने

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नमस्ते कोरबा ::छत्तीसगढ़ के जननेता हरिजन, आदिवासी, पिछडे वर्ग सहित श्रमिक कृषकों के हित चितंक छत्तीसगढ़ की अस्मिता के दैदीप्यमान नक्षत्र महंत बिसाहूदास के योगदान को कभी भुलाया नही जा सकता। उक्त कथन महापौर राजकिशोर प्रसाद ने ओपन थियेटर घंटाघर के पास स्थित स्व. बिसाहूदास महंत स्मृति उद्यान में आयोजित उनकी 97वीं जयंती के अवसर पर विचार रखते हुए व्यक्त किया। राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि महंत जी जनप्रिय राजनेता थे चार बार मध्यप्रदेश में कैबिनेट मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक कार्य निर्वहन की क्षमता को कभी भी भुलाया नही जा सकता। महंत जी कबीर पंथी होने के साथ-साथ गांधीवादी विचारक थें। सादा जीवन उच्च विचार की गरिमा को हर हमेशा जीवन की उच्चतम मूल्य मानते थे। सरलता, सहजता एवं मिलन सरिता के वे एक जीवंत प्रतिमूर्ति थे।
सभापति श्याम सुंदर सोनी ने स्व. बिसाहूदास महंत के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ की कल्पना, छत्तीसगढ़ी भाषा की कल्पना, हंसती खिलखिलाती संस्कृति का सपना देखा था स्व. बिसाहूदास महंत ने। श्याम सुंदर सोनी ने कहा कि आज बिसाहूदास महंत जी हमारे बीच नही है लेकिन हम सबको उनके त्यागमय जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है। वे राजनीति को सेवा कार्य मानते थे। विद्यार्थी जीवन से ही स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति उनका लगाव था। आज जरूरत है महंत जी के लोक आदर्शो से प्रेरणा ग्रहण करने की।
जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद प्रतिनिधी हरीश परसाई ने स्व. बिसाहूदास महंत जी को याद करते हुए कहा बिसाहूदास महंत जी बहुत अच्छे संसदविज्ञ थे। अपनी ओजस्वी शैली और कुछ कर दिखाने के जज्बे के कारण वे संसदीय जगत के पुरोधा माने जाते थे।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष सपना चौहान ने बिसाहूदास महंज जी की 97वीं जयंती कार्यक्रम के अवसर पर कहा कि स्व. बिसाहूदास महंत जी की स्मृतियों को सहेजना और उनके मानवीय संवेदना के पक्ष को उजागर करना आवश्यक है क्योकि वे जनसेवक और छत्तीसगढ़ के माटी के लाल बहादूर थे।
जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी ने अपने विचार मे बताया स्व. बिसाहूदास महंत जी के विचार, सिद्धांत एवं अनुशासन आज भी सामुदायिक कल्याण के परिपेक्ष्य में सर्वथा प्रासंगिक है।
एल्डरमेन संगीता सक्सेना ने कहा कि स्व. बिसाहूदास महंत जी ने अपनी कुशाग्र बुद्धि का उपयोग मानव सेवा एवं पीड़ितो के लिए किया। वे जितने धीर और गंभीर थे उतने ही विनोद प्रिय थे।
इस अवसर पर अर्चना उपाध्याय, गजानंद साहू, सुकसागर निर्मलकर, मो. शाहीद, धरम निर्मले, बाब खान, गोपाल थवाईत, गोपीलाल सारथी, संजय बरेठ, बंटी अग्रवाल, मो. अजीज खान, देव प्रसाद रत्नाकर, विमल थवाईत, राजेश यादव, गीता गभेल, सीमा उपाध्याय, ममता अग्रवाल, गौरी चौहान, गीता महंत, मुन्ना नायक, राजेश यादव, अविनाश बंजारे ने भी बिसाहूदास महंत की प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित करते हुए उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला।
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