कोरबा में इंसान और बेजुबान की दोस्ती,20 से अधिक बिल्लियों को पालता है परिवार,देखिए यह खास खबर
नमस्ते कोरबा : बिल्ली के रोने की डरावनी आवाज और काली बिल्ली रास्ता काटना लोग अपसगुन मानते है। अनहोनी की आशंका में कई तरह के जतन करने लगते है। इन मान्यताओं से दूर कोरबा में रहने वाला एक परिवार कैट लवर है। उनके घर में एक नही, दो नही बल्कि 20 से अधिक बिल्लियों का कुनबा बड़े इत्मीनान से रहता है।
आईटीआई रामपुर में रहने वाली विमला मोजेश के दो बेटे, एक बेटी और एक पोती है। इनके अलावा इस परिवार में 20 से अधिक सदस्य और रहते है, जो बेहद खास है। ये बिल्लियां विमला की लाडली हैं। सुबह के नास्ते से लेकर, लांच और रात का खाना इन बिल्लियों के साथ होता है। बिल्लीयो के बीमार होने पर विमला पशु चिकित्सकों के ओब्जर्वेशन में इनका इलाज भी करती है।

दरसल तीन साल पहले विमला को घर के बाहर जख्मी हालत ने एक बिल्ली का बच्चा मिला। उसे घर ले आई। इलाज के बाद kitte पूरी तरह ठीक हो गई और इस परिवार की सदस्य भी बन गई। उसका नाम था बेबो। इसके बाद लगातार बिल्लियों की संख्या बढ़ती गई। आज इस घर में 20 से अधिक बिल्लियां उछलते फांदते नजर आते है। इन बिल्लियों का नाम भी है। काली, टुकटुक, पुसी, मैगी, लिली अपना नाम सुनते ही भागी चली आती हैं।
सिर्फ बिल्ली ही नही बल्कि गिलहरी, लव बर्ड और डॉग भी मोजेस फैमिली के मेंबर रह चुके है। विमला कहती हैं कि लोग बिल्लियों को लेकर तरह-तरह के अपशकुन मानते हैं, लेकिन ये बिल्लियां मेरे लिए काफी लकी हैं। इनकी देखभाल दूसरे पालतू जानवरों की तरह ज्यादा नहीं करनी होती। डॉग पालने में जो खर्च होता है। बिल्ली पालने में उससे कम खर्च होता है। ये बिल्लियां अपनी मां की तरह विमला की बात सुनती और मानती है। इस शौंक के लिए विमला और आशी इलाके में मशहूर हैं।









