कोरबा के ग्रामीण क्षेत्रों में तपती धूप में मेहनत कर ग्रामीण कर रहे हैं हरे सोने का संग्रहण,हरे सोने का संग्रहण बना ग्रामीणों के आय का स्रोत

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कोरबा के ग्रामीण क्षेत्रों में तपती धूप में मेहनत कर ग्रामीण कर रहे हैं हरे सोने का संग्रहण,हरे सोने का संग्रहण बना ग्रामीणों के आय का स्रोत

नमस्ते कोरबा : औद्योगिक जिले के वनांचल में रहने वाले ग्रामीण तेंदूपत्ता को हरा सोना मानते हैं। गर्मी के दिनों में जब उनके पास न तो खेतों में आय का माध्यम होता है और न ही घर में कुछ काम। इस बीच तेंदूपत्ता का संग्रहण उन्हें मेहनत एवं संग्रहण के आधार पर पारिश्रमिक देता है। वनांचल में रहने वाले ग्रामीणों के लिये तेंदूपत्ता के प्रति मानक बोरा की दर में हुई वृद्धि ने खुशियां जगा दी है।

प्रकृति ने कोरबा जिले को कई प्रकार के उपहार दिए हैं.

प्रकृति ने कोरबा जिले को कई प्रकार के उपहार दिए हैं. इनमें जैव विविधता के साथ-साथ वन संपदा भी शामिल है. जंगलों से प्राप्त होने वाले सामान उन इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का सबसे बड़ा माध्यम बना हुआ है. वनांचल क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों के लिए तेंदूपत्ता, सोना से कम नहीं है.

तपती धूप में मेहनत कर हरे सोने का संग्रहण

तपती धूप में मेहनत कर हरे सोने का संग्रहण करते हैं. इसके एवज में मिलने वाले पैसों से अपनी जरूरतों को पूरा करते हैं. इस बार हरे सोने से संग्राहक ग्रामीण मालामाल होंगे. दरअसल शासन ने इसकी कीमत बढ़ा दी है. बीते वर्ष तेंदूपत्ते की खरीदी प्रति मानक बोरा 4 हजार के दर से की गई. इस वर्ष संग्राहकों को प्रति सैकड़ा 550 रुपए मिलेंगे. यह राशि सीधे बैंक खाते में जमा किए जाएंगे.

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जिले का करीब 60 फीसदी हिस्सा वनों से आच्छादित

देश में कोरबा की पहचान औद्योगिक नगरी के रूप में की जाती है. यहां संचालित एसईसीएल की भूमिगत और खुली खदानों में हजारों टन कोयले का उत्पादन किया जाता है. विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली बिजली से कई राज्य रोशन होते हैं. इस मामले में कोरबा का जंगल भी कम नहीं है. जिले का करीब 60 फीसदी हिस्सा वनों से आच्छादित है. जिसे कोरबा व कटघोरा वनमंडल में विभाजित किया गया है. दोनों ही वनमंडल में वन्यजीवों और औषधीय गुण वाले पेड़-पौधों की भरमार है.

ग्रामीणों द्वारा महुआ चार चिरौंजी सहित कई प्रकार के वनोपज का संग्रहण किया जाता है

वनांचल क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों द्वारा महुआ चार चिरौंजी सहित कई प्रकार के वनोपज का संग्रहण किया जाता है, जिसकी मांग राज्य के अलावा विभिन्न प्रांतों में भी होती है. उनके लिए आय का प्रमुख स्त्रोत तेंदूपत्ता संग्रहण है. ग्रामीण महज कुछ ही दिनों के भीतर अच्छी-खासी आमदनी कमा लेते हैं. इस राशि का उपयोग वे न सिर्फ घरेलू जरूरतों के लिए करते हैं, बल्कि शादी ब्याह, मकान बनाने जैसे खर्चीले काम पर भी किया जाता है.

 

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