Sunday special :- कोरबा में संचालित है एक ऐसा बैंक जहां पैसे नहीं,भिक्षुक व मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को मिलती है रोटियां
नमस्ते कोरबा :- अभी तक आपने ऐसे बैंकों के बारे में सुना होगा जिसमें पैसों का लेनदेन किया जाता है, आज हम आपके शहर में संचालित एक ऐसे बैंक के बारे में बताने जा रहे हैं जो जरूरतमंदों को दो समय भोजन प्रदान करता है, शहर के मुख्य मार्गों के किनारे व रेस्टोरेंट व होटल के सामने कभी भिक्षुक व मानसिक रूप से अस्वस्थ लोग भोजना मांगते या फिर कूड़ेदान में खाने का सामान ढूंढ़ते नजर आते थे. लेकिन शहर में अब ऐसा नजर नहीं आता है क्योंकि ऐसे जरूरतमंदों तक दिन के दोनों समय भोजन उपलब्ध कराने शहर में रोटी बैंक सेवा चल रही है.

छत्तीसगढ़ हेल्प वेलफेयर सोसायटी रोटी बैंक सेवा चला रही है
दरअसल विगत कई वर्षों से शहर में मानव सेवा से जुड़ी संस्था छत्तीसगढ़ हेल्प वेलफेयर सोसायटी रोटी बैंक सेवा चला रही है. संस्था के दो कार्यकर्ता शिवा प्रतीक व मिहिर जहां दोनों समय सेवा में लगे रहते हैं.
बड़े नसीब वाले होते हैं, जिन लोगों को 2 जून की रोटी नसीब होती है
बड़े नसीब वाले होते हैं, जिन लोगों को 2 जून की रोटी नसीब होती है’ यह कहावत आपने अक्सर अपने घर, परिवार में बड़े बुजुर्गों से जरूर सुनी होगी. आपको बता दें कि इस कहावत का जून महीने से कोई मतलब नहीं है. सही मायने में इस कहावत का मतलब यह है कि दिन में 2 समय रोटी बड़े नसीब या बड़ी मुश्किल से मिलती है. देखा जाए तो जीवन की सबसे बड़ी जद्दोजहद पेट पालने की ही है.
कोसाबाड़ी से लेकर सीतामढ़ी तक के 80 परिवार भी इनके सहयोग में जुड़े हैं
पेट की भूख को शांत रखने के लिए ही इंसान रात-दिन मेहनत करता है. फिर भी देशभर में कई ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें 2 वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है. लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक सामाजिक संस्था ने इस दिशा में पहल करते हुए असक्षम लोगों को 2 वक्त भरपेट खाना खिलाने का बीड़ा उठाया है.
कोसाबाड़ी से लेकर सीतामढ़ी तक के 80 परिवार भी इनके सहयोग में जुड़े हैं. ऐसे परिवार की महिलाएं हर दिन दोनों समय स्वभाव से रोटी, चावल व सब्जी बनाकर संस्था को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए देती हैं.दोनों समय का भोजन एकत्रित कर कार्यकर्ता शिवा व मिहिर संस्था के सेवा आश्रम, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन, साप्ताहिक बाजार के शेड समेत अन्य जगह पर मौजूद जरूरतमंदों तक पहुंचते हैं.
200 लोगों को दो वक्त का भोजन
शिव प्रतीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ हेल्प वेलफेयर सोसायटी के प्रमुख राणा मुखर्जी, शहर में सड़क किनारे बेसहारा, भिक्षुक व मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को भोजन तलाशते हुए देखकर रोटी बैंक सेवा की शुरुआत 5 साल पहले 21 जून 2018 को की थी. तब से अब तक नियमित रूप से दोनों समय दानदाताओं के घर से कार्यकर्ताओं द्वारा भोजन संग्रहण कर जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा रहा है. वर्तमान में प्रतिदिन 2 सौ लोग लाभान्वित हो रहे हैं.
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