महिला दिवस विशेष
पहले की तुलना में महिलाएं काफी सशक्त हुई है । उन्होंने हर क्षेत्र में आगे बढ़कर खुद को साबित किया है, फिर भी कई क्षेत्रों में उनकी भागीदारी कम है । आत्म निर्भर होने के साथ अपने फैसले स्वयं करना , शिक्षा कैरियर चुनने की स्वतंत्रता जैसे आज भी ऐसे कई विषय हैं जिन पर महिला सशक्तिकरण की दृष्टि से काम करने की जरूरत है ।आज के समय में महिलाओं और पुरुषों को एक समान माना जाता है , पर पहले ऐसा नहीं था । पुराने समय में महिलाओं को पुरुषों की पैरों की जूती समझा जाता था , और आज के समय में हर क्षेत्र में महिलाओं का पुरुषों के समान योगदान होता है ।समाज में महिलाओं के योगदान और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में पूरे विश्व भर में 8 मार्च को हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है । प्रतिष्ठित , बुद्धिजीवी और सामाजिक क्षेत्र में भागीदारी निभाने वाली महिलाओं के राय …
कंधे से कंधा मिलाकर चलती नारी
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की कोरबा शाखा अध्यक्ष श्रीमती सरोज सुनालिया का कहना है कि – नारी का सारा जीवन पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में ही बीत जाता है । पहले पिता की छत्रछाया में उसका बचपन बितता है । पिता के घर में भी उसे घर का काम काज करना होता है , तथा साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखनी होती है । उसका यह क्रम विवाह तक जारी रहता है । उसे इस दौरान घर के कामकाज के साथ पढ़ाई लिखाई की दोहरी जिम्मेदारी निभानी होती है , जबकि इस दौरान लड़कों की पढ़ाई लिखाई के अलावा और कोई काम नहीं रहता है । कुछ नवयुवक ठीक से पढ़ाई भी नहीं करते हैं , जबकि उन्हें इसके अलावा और कोई काम ही नहीं रहता । इस नजरिए से देखा जाए तो नारी सदैव पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तो चलती ही है , बल्कि उनसे भी अधिक जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करती है ।
बढ़ जाती है जिम्मेदारियों का बोझ
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के अध्यक्ष श्रीमती उषा अग्रवाल का मानना है कि – विवाह पश्चात महिलाओं पर और भी भारी जिम्मेदारियां आ जाती है ।पति , सास , ससुर, देवर , ननंद की सेवा के पश्चात उनके पास अपने लिए समय ही नहीं बचता वे कोल्हू के बैल की तरह घर परिवार में ही खटकती रहती है । संतान के जन्म के बाद तो उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है । घर परिवार , चौके चूल्हे खटने में ही एक आम महिला का जीवन कब बीत जाता है पता ही नहीं चलता । कई बार वह अपने अरमानों का भी गला घोट देती है । घर परिवार की खातिर इन्हें इतना समय भी नहीं मिल पाता है कि – वह अपने लिए भी जिए परिवार के खातिर अपना जीवन समर्पित करने में भारतीय महिलाएं सबसे आगे हैं ।
युगो युगो से नारी पूजनीय है
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रेखा महमिया का कहना है कि – बच्चों में संस्कार भरने का काम मां के रूप में नारी द्वारा ही किया जाता है । वह तो हम सभी बचपन से सुनते चले आ रहे हैं कि – बच्चों की प्रथम गुरु मां ही होती है । मां के व्यक्तित्व, कृतित्व का बच्चों पर सकारात्मक, नकारात्मक दोनों प्रकार का असर पड़ता है । इतिहास उठाकर देखें तो युग युग से नारी पूजनीय ही है । मां पुतलीबाई ने गांधी जी के, जीजाबाई ने शिवाजी महाराज में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण किया जिसका ही परिणाम है कि – शिवाजी महाराज व गांधी जी को हम आज भी उनके श्रेष्ठ कर्मों के कारण जानते हैं । इनका व्यक्तित्व विराट व अनुपम है । बेहतर संस्कार देकर बच्चों को समाज मेंउदाहरण बनाना नारी ही कर सकती है ।
हर क्षेत्र में महिलाएं आगे
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन कोरबा की कोषाध्यक्ष श्रीमती मनीषा अग्रवाल का कहना है कि – इतिहास में देवी अहिल्याबाई होलकर , मदर टेरेसा, इला भट्ट, महादेवी वर्मा, सुभद्रा चौहान ,राजकुमारी ,अमृत कौर , अरुणा आसफ अली, सुचेता कृपलानी, विजय लक्ष्मी पंडित, कस्तूरबा गांधी, इंदिरा गांधी आदि जैसी कुछ प्रसिद्ध महिलाओं ने अपनी मन , वचन व कर्म से सारे संसार में अपना नाम रोशन किया है । कस्तूरबा गांधी ने महात्मा गांधी का बाया हाथ बनकर उनके कंधे से कंधा मिलाकर देश को आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । विजेता लक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र संघ की अध्यक्ष बन भारत की गौरव गरिमा को चार चांद लगाया ।महादेवी वर्मा ने अपनी कविताओं के माध्यम से पूरे विश्व की भावनाओं को अपने में समाहित करने में सफल रही । इस तरह से हर क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ते जा रही है ।
नारी का स्थान सर्वोपरि
कोरबा शाखा की सचिव श्रीमती सरिता अग्रवाल कहती हैं कि – भारतीय संस्कृति में महिलाएं समाज का मुख्य हिस्सा होती है,तथा आर्थिक , राजनीतिक और सामाजिक क्रियाओं में एक बड़ी भूमिका निभाती है ।महिलाओं की सभी उपलब्धियों की सराहना करने और याद करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का उत्सव मनाते हैं । भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्व दिया गया है । यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता वर्तमान में जो हालात महिलाओं की दिखाई देती है । जिसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला आ रहा है । उसे भोग की वस्तु समझकर आदमी अपने तरीके से इस्तेमाल कर रहा है जो बेहद दुखद स्थिति है , लेकिन भारतीय संस्कृति को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किया जाए ? इस पर विचार अति आवश्यक है ।
नारी का हमेशा सम्मान हो
अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती शशि अग्रवाल का मानना है कि – नारी पूज्य है ।जो मां , बहन , अर्धांगिनी सभी भूमिकाओं को एक साथ निर्वहन करती है । मां अर्थात माता के रूप में नारी धरती पर अपने सबसे पवित्रम रूप में है । मां अर्थात जननी मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है , क्योंकि ईश्वर की जन्म दात्री नारी ही है । मां देवकी से कृष्ण , कौशल्या से राम , पार्वती से गणेश , कार्तिकेय के संदर्भ में हम देख सकते हैं , किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है । यह चिंताजनक पहलू है , सब धन लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं । परंतु जन्म देने वाली माता के रूप में नारी का सम्मान अनिवार्य रूप से होना चाहिए । जो वर्तमान समय में कम हो गया है । यह सवाल आजकल यक्ष प्रश्न की तरह चहू और पांव पसारता जा रहा है । इस बारे में नई पीढ़ी को आत्मालोकन करना होगा ।
हर क्षेत्र में आगे बढ़ती नारी









